Saturday, April 6, 2013

संजय दत्त ( a confused pawn)

मैंने न्यूज़ पेपर में पढ़ा मुंबई ब्लास्ट का निर्णय आ गया ,इस घटना के वक्त मै हॉस्टल में था ,कैद में था क्लास 3 में था , आज गर्व है, की हम भारत के नागरिक है , दुःख है 257 लोग मारे  गए , 713 लूले लंगड़े घायल हो गए थे, इसमें तमाम लोग , बच्चे यतीम हो गए , तमाम बेसहारा हो गए , तो तमाम जीवन भर भुगतने के दर्द से तड़पते रहे है ,। इस घटना में 123 अभियुक्त सामिल थे , जो किसी देश की एक बड़ी फ़ौज की टुकड़ी के बराबर है , ये आतंकवादी भारत के अन्दर आये , साजिस रचने का जाल फैलाया और अपने घटना कार्य को अंजाम देकर देश से चुप-चाप बाहर भाग गए ,और इन्ही साजिस के शिकार  बन गए  नादान  -मजबूर भारतीय , उन्ही में दुर्भाग्य से संजय दत्त भी कानून के लपेटे में आ गये , माँ का साया 22 साल की उम्र में उठ जाने की वजह से दिशाहीन इस व्यक्ति को साजिस रचने वालो ने संपर्क किया उन्हें तड़क -भड़क ,पैसे ,रोब और अपने पॉवर का दबदबा दिखाया ,तमाम पार्टियों और फिल्मो के जरिये संपर्क किया ,यह भी कहा जा सकता है , उस 34 साल के नवयुवक  को 
आतंक के प्रमुख बड़े ठेकेदारों ने ब्रेनवाश कर एक डर  या भय के मध्य जकड कर ,उस 34 साल से भी कम उम्र के संजय दत्त को   गुनाह के जाल में फँसा  दिया ,जो की कॉलेज जाने वाले हम आप भी हो सकते है , संजय दत्त ने किसी को मारा  ,धमकाया या मर्डर तो नहीं किया , और वो आतंकी पद ,पॉवर,पैसे का रोब दिखाने  वाले वो अधिकतर सरहद के पार भाग गए और जो मजबूरन अपराधी थे , वो तो गुनाहगार  हुए ही , सच है ,कानून सबके लिए समान  है । शुक्र है संजय दत्त भारत के नागरिक है ।
फिर भी इन बातो को देखते हुए संजय दत्त ज्यादा को  ज्यादा 1 साल की ही सजा मिलनी चाहिए थी ,।
 क्यों की वो सिर्फ एक डरा ,दिशा भ्रमित मोहरा भर थे ,उन्होंने डेढ़ साल तक पहले ही जेल में सजा भुगत चुके है ,। सजा से बरी होने के बाद उन्होंने इन कई सालो में तमाम नेक कार्य किये , तमाम समाज सेवी संघटनो से जुड़े ,तमाम ट्रस्ट ,अनाथ आलयो में भी धन योगदान दिया,कार्य किया, मैंने उन्हें t .v  पर बच्चो के लिए भावुक होते देखा है ,। क्या कोई जज्बात के साथ भी धोखा दे सकता है , शायद नहीं , वो सिर्फ एक दिशा भ्रमित , डरे , नवयुवक , मोहरा थे , अगर फिर भी वो दोषी है , अतः उन्हें कम से कम सजा मिलनी चाहिए  1 वर्ष या अन्य तक  , चूँकि एक-चार भारतीय सैनिक बार्डर या आतंक से लड़ते हुए औसतन हर महीने शहीद होते रहते है , इसलिए जेल के अन्दर संजय  दत्त को सुविधा जरुर मिले , संजय दत्त एक फ़िल्मी हीरो ही नहीं है , उन्हें वास्तविक हीरो भी बनना होगा और वो जेल के अन्दर असुविधा पर खुल कर बोल सकते है ।
                                                लेखक;- हमदर्दी के साथ ...रविकान्त यादव 

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 लेखक ;-चुनकर ...रविकांत यादव