Friday, January 29, 2016

सामान्य ज्ञान part 4 test UR G.K. (Earth and Festivals)

हर प्रश्न  एक अंक का है , कृपया  उत्तर  न देखे कही लिख ले  व स्वयं को जाँचे व अपना अंक या प्रतिसत चेक करे ???!!!!???????

5 तक बताने वाले कमजोर g.k वाले 
5 -10 तक बताने वाले ;- औसत 
11 -15 तक बताने वाले  ;- अच्छे 
16 -20 तक बताने वाले ;- बहुत अच्छे g.k 
21 से लेकर 31 तक बताने वाले ;- सर्वोत्तम 

१)कहा 6 महीने दिन व 6 महीने रात रहती है ?
१) कोरिया (नार्थ कोरिया साउथ कोरिया )
२)आर्कटिक (नार्थ पोल साउथ पोल )
३) नॉर्वे 
४) उत्तरी कनाडा 

2)विश्व में सबसे ऊँचा रणक्षेत्र  है ?
१)कारगिल 
२) सियाचिन 
३) लेह -लद्दाख 
४) एवेरेस्ट 

3)अक्षय तृतीया को किसका जन्मदिन पड़ता है ?
१)सोना 
२)विश्वामित्र 
३)महर्षि वेदव्यास 
४)परशुराम 

४)किस पर्व को अलग अलग नाम से अलग अलग राज्यों में एक साथ तीन राज्यों में और मनाया जाता है ?
१)होली 
२)महाशिवरात्रि 
३)मकर संक्रांति 
४)ईद 

५)गंगा दसहरा  क्या है ?
१)गंगा अवतरण 
२) गंगादिवस 
३)गंगा पूजा 
४)गंगा अभियान


 

६)हिन्दू गुरु पूजा गुरु पूर्णिमा दिवस है ?
१)राधाकृष्णन जयंती 
२)वाल्मीकि जयंती 
३)वेदव्यास जयंती 
४) विश्वामित्र जयंती 

7)महाशिवरात्रि क्या है ?
१)शिव जन्मदिन 
२)शिव विवाह दिन 
३)शिव तांडव दिवस 
४) शिव का ज्ञान दिवस 

8 ) गंगा दशहरा के दिन  गंगा स्नान से कितने तरह के पापो से मुक्ति मिलती है ?
१) 10 
२) 11 
३) 7 
४) 51 

9 ) सुनामी कहा का शब्द है ?
१) अंग्रेजी 
२) भारतीय 
३) रसियन 
४) जापानी 

१०) पृथ्वी का चक्कर  कौन काट रहा है ?
१) सूर्य 
२) मंगल 
३) चन्द्रमा 
४) पुच्छल तारा 


11) चन्द्रंमा पृथ्वी का एक चक्कर कितने दिन में लगाता है ?
१) 11 
२) २४ 
३) 27 
४) 31 

१२)सूर्य का एक चक्कर लगाने में पृथ्वी को कितने दिन लगते है ?
१) 255. 5 
२) 432  
३) 365 
४) 420 

१३) अंतरिक्ष में पृथ्वी की गति कितनी है ?
१) 30 k.m. per second 
२) 12 k.m. per second 
३) 24 km per second 
४) 7 km per second 

१४) 24 घंटे का रात और 24 घंटे का दिन होता है ?
१) जापान में 
२) नार्वे 
३) हांगकांग 
४) अफ्रीका 

१५) गर्मी में २४ घंटे दिन रहता है और सर्दी में २४ घंटे रात रहती है , कहा ?
१) ग्रीनलैंड 
२) स्वीडन 
३) अलास्का 
४) उपरोक्त सभी 

16)  ईस्टर किस दिन ही मनाया जाता या पड़ता है ?
१) रविवार 
२) सोमवार 
३) मंगलवार 
४) बुधवार 

17) किस एकादसी के व्रत से सभी  एकादसियो  के व्रत का फल मिलता है ?
१) सफला एकादसी से 
२) विजया  एकादसी से 
३) निर्जला एकादसी से 
४) पुत्रदा एकादसी से 

18) ईस्टर क्यों मनाया जाता है ?
१) यशु जन्मदिन 
२) यशु मोक्ष 
३) यशु बलिदान दिवस 
४) यशु पुनर्जीवन 

19) बौद्ध धर्म का सबसे प्रमुख त्यौहार है ?
१) मघा पूजा और सांगकरन  
२) मधुपुर्णिमा 
३) बेसक 
४) बोधि दिवस 

20) हिन्दू धर्म से बहुत समानता वाले जैन धर्म का प्रमुख त्यौहार है ?
१) कार्तिक पूर्णिमा 
२) परयुसन महापर्व 
३) अक्षय तृतीया 
४) मौन एकादसी 

21) उरेनियम का सबसे बड़ा उत्पादक देश है ?
१) ऑस्ट्रेलिया 
२) कनाडा 
३) कज़ाकिस्तान 
४) चीन 

22) सोने का सबसे बड़ा उत्पादक देश है ?
१) चीन 
२) ऑस्ट्रेलिया 
३) रूस 
४) अमेरिका 

23)  कोयले का सबसे बड़ा उत्पादक देश है ?
१) अमेरिका 
२) रूस 
३) चीन 
४) जर्मनी 

२४) भारत किसका सबसे बड़ा उत्पादक है ?
१)  अभ्रक ( mica )
२) पीतल ( brass )
३) जस्ता (zinc )
४) ताम्बा ( copper ) 

25)  पेट्रोल का सबसे बड़ा उत्पादक देश है ?
१) इराक 
२) ईरान 
३) कुवैत 
४) सऊदी अरब 


26) सबसे बड़ा महाद्वीप है ?
१) एशिया 
२) यूरोप 
३) अफ्रीका 
४) ऑस्ट्रेलिया 

२7) सबसे बड़ा समुद्र है ?
१) हिंदमहासागर 
२) प्रशांत महासागर 
३) आर्कटिक महासागर 
४) अरब महासागर 

28) मानव निर्मित सबसे बड़ा आस्चर्य निर्माण कौन सा है ?
१) स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी 
२) चाइना वाल 
३) एफिल टावर 
४) ग़िज़ा पिरामिड 

29) भारतीय रास्ट्रगान कितने सेकंड का है ?
१) 60 सेकंड 
२) 32 सेकंड 
३) 57 सेकंड 
४) 52 सेकंड 

30) मैग्नेटिक (चुम्बकीय ) हिल कहा है ?
१) भोपाल , मध्य प्रदेश 
२)  लद्दाख , जम्मू कश्मीर 
३) नैनीताल , उत्तराखंड 
४) शिमला , हिमाचल प्रदेश 

31) पूर्ण हिन्दू राष्ट्र  (देश) है ?
१) सिंगापुर 
२) फ़िजी 
३) भारत 
४) नेपाल 
लेखक;-   क्विज मास्टर,,,,,,,,,,,रविकान्त यादव  for more join me;-facebook.com/ravikantyadava 
उत्तर ;- १)  २ आर्कटिक नार्थ पोल साउथ पोल    २)  २ सियाचिन    ३)४ परशुराम    ४) ३ मकर संक्रांति    ५) १ गंगावतरण     ६) ३ वेदव्यास जयंती    ७)२ शिवविवाह दिन     ८) १ 10    ९) ४ जापानी    १०) २ चन्द्रमा    ११)३  27 दिन में    12)  3  365 दिन     १३) १ 30 km p second   14) २ नॉर्वे    १५) ४ सभी    १६)  १ रविवार    17) ३  निर्जला एकादसी   18) ४ यशुपुनर्जीवन   19) ३ बेसक   2०) २ पर्युसन महापर्व  २१)  ३ कज़ाकिस्तान    २२) १ चीन      23)३ चीन   २४)१ अभ्रक   २५) ४ सऊदी अरब    26)  १ एशिया    27) २ प्रशांत महासागर    २८) २ चीन वाल     29)४ 52 सेकंड   30)२ लेह लद्दाख जम्मू कश्मीर   ३१) ४ नेपाल 


Thursday, January 28, 2016

मेरे अमर विचार part 7 (my immortal thought my way and my world )


*पतंगों को जमीन से नफरत होती है ,क्यों कि वो हवा में ही लहराना जानती है ।

*सपने अपने होते है ,इसलिए सपने देखना बुरी बात नहीं है , बसर्ते वो टूटे न और उनका एक समय हो । 

*खुसिया बेसकीमती  होती है , स्थायी नहीं होती जब तक शांति न रहे । 

*समय कीमती है ,परन्तु कार्य की वजह से , कार्य को देखो समय का पता ही नहीं चलेगा । 

*हिंसकता , और चाहत कुछ नया करने की सनक के सिवाय कुछ नहीं है ।

* भोजन के वास्तविक शौकीन लोग वही हो सकते है , जो स्वयं भोजन बना सकते हो । 

* यदि व्यक्ति अपने कर्तव्यो को पूरी निष्ठा , समर्पण, ज्ञान से कुछ एक घंटे भी निर्वहन करता है , तो वही देश के अंदर का प्रहरी है व योग्य व्यक्ति है । 

*गुजरे वक़्त , दर्द, और साल की क्या फिक्र करे ,शुक्र है , जिसके लिए हम जीते है , वह बीत  गया । 

*पुरस्कारों का लोभ और चाहत रखने वाला कभी पुरस्कार हासिल नहीं कर सकता या उसे इस योग्य नहीं बनाना चाहिए । 

*सम्मान मिटता नहीं केवल उपेक्षित हो जाता है । 

*प्रतिशोध तभी उत्पन्न होता है , जब समाज के लोग हमारे लायक नहीं होते और हमारे लायक नहीं करते । 

*सृजनता में सौ साल लग सकते है पर टूटने में सेकंड भर लगते है । 

*क्रोध न कोई रोग है  न इसका इलाज़ ,जब तक यह जींद न बने । 

*कला की कदर   करामाती ,करिश्माई, काबिल , कारीगर कोई ही कर कमल से करता है । 

* सत्ता , शौक , शादी की कठिन कीमत चुकानी पड़ती है । 
* बनी बनायीं बाते  सही होती है , बस जरुरत होती है , बदलाव और सोचने की । 

*संघर्ष जीवन का बचत खाता है ,जो ब्याज के रूप में मिलता है । 
* अच्छे कर्तव्य से बढ़कर कुछ नहीं ,धन , सम्पदा , मान , सम्मान कुछ नहीं । 

*अपमान वह घाव है ,जिस पर कोई मरहम काम नहीं करता , परन्तु ये स्वयं का कारण होता है । 

*स्वार्थी होना एक फायदे का सौदा है । 

* नेक बनो , एक बनो । 
*भ्रस्टाचार वह दीमक है , जो हरे भरे फलते फूलते वृक्ष को जड़ सहित सुखा देता है , केवल ढांचा बच जाता है , परन्तु ईर्ष्या द्वेष तो पनपने भी नहीं देना चाहता , बचो इनसे । 

*व्यक्ति की रूचि काफी हद तक  चरित्र बता देती है । 

* समस्या आती है , सिखाने के लिए पर थोपी जाती है दिखाने के लिए अब क्या दिखाई दे । 

*यदि कोई आपसे जिद करे तो सबसे बेहतर होगा उसे अकेले छोड़ दे । 

* भ्रस्टाचार मुक्त देश एक पारदर्शी शीशे में जल सामान है । 

*पाप से डरो पापी से नहीं , जहा कुछ नहीं वहा  रहा जा सकता है , पर जहा सबकुछ है ,पर वहा के जन सही नहीं वहा न रहना ही उचित ज्ञान योग्य होगा । 
*कर्तव्य में भावनाओ का कोई स्थान नहीं  होता । 

*अच्छी से अच्छी किताबे अच्छे से अच्छे दोस्त को भी पीछे छोड़ सकती  है । 

*अच्छी आशा को निराशा में लाने वाले पापी होते है । 

*देश के लिए हज़ार कठिनाईवो को सहने के बाद भी देश प्रेम - देश का प्रणाम और अमूल्य व्यक्ति होता है । 

*विचारो की स्वक्षता व्यक्ति के विश्वस्यनिता का प्रणाम पत्र है । 
*अपने बातो को बेधडक  बोलो लेकिन एक बार सोचो क्या यह संभव और संगत है । 

*एक हंसी स्वयं को खुसी और स्वास्थ्य देती है , परन्तु दुसरो को हसाने वाले को प्यार और कामयाबी मिलती है । 
*सम्मान को बाँटा जाय तो ठीक है , नहीं तो सम्मान न देने वाला संदेह के योग्य , सम्मान के अयोग्य हो जाता है । 
*समय और परिस्थिति अनुसार ढलना  न्यायोचित है , परन्तु समाज अनुसार ढलना हितकर है । 

*कभी कभी दोस्ती की कीमत जान होती है , आज  दोस्ती जांच परख कर ही करे वरना न करे तो ही हित होगा क्यों की ये दोस्ती दलदल में फंसने जैसा होगा । 

*माफ़ करना सीखना भी एक कला सिद्धि है , इसके पश्चात सभी दुखो आतंरिक क्लेश का अंत हो जायेगा । 

*बेरोजगारी हिंसा की हितैसी व कारण है । 

*आप जो नहीं हो , अगर वही आप विनम्रता , सम्मान , प्यार , की आशा करते है , तो आप से बड़ा बेवकूफ मुर्ख दूसरा न होगा । 
*यदि हम अपनी वास्तविकता स्वीकार कर ले तो न ज्यादा पाने का लोभ दुःख होगा और न  अहंकार  क्यों की जो भी है , मेरा कर्म , गुण , ज्ञान, इसी योग्य है , मै ईश्वर नहीं हु उसी का निर्धारण है , और मेरी प्रतिभा यही तक है । 

*यदि आप  माफ़ी नहीं दे सकते तो माफ़ी पाने मांगने का भी आपको उम्मीद नहीं होनी चाहिए , आप इस योग्य नहीं है । 

*विपदा कभी बता कर नहीं आती इसके लिए चौरस आँखों की जरुरत होती है । 

*चोरो को कोई चेहरा नहीं दीखता उनको केवल  ख्वाब लत दिखता   है , जिसे वो पूर्ण करना चाहते है । 

*रोष न पसंद प्रतिकार पर ही उत्पन्न होता है । 
*गलतिया हमें चेतावनी देती है , और सिखने का अवसर प्रदान करती है । 

* दुसरो के लिए जीना आना चाहिए वरना जिंदगी का विशेष महत्व नहीं रहेगा । 

*क्रोध एक प्रतिक्रियात्मक क्रिया है । 

*कार्य जल्दबाज़ी केवल औपचारिकता होती है , गड्ढे नहीं दिखते । 

*हमने क्या किया ,क्या नहीं , ये मूल्याङ्कन करना हमारा कार्य नहीं है , हमारा काम है , हमने जो किया उससे कितने चेहरों पर ख़ुशी आयी । 


* महाभारत में एकलव्य गुरु द्रोण के पास धनुर विद्या सिखने जाता है , परन्तु गुरु ने उसे छोटी जाति का कह कर उसे विद्या देने से मना कर दिया , तब एकलव्य जंगल में जाकर द्रोण  गुरु की प्रतिमा बना कर उनके सामने धनुर विद्या का अभ्यास करने लगा तथा कुछ ही समय में वह गुरु के श्रेष्ठ शिष्य अर्जुन से भी बड़ा धनुर्धारी बन गया , जब उसके मान्य गुरु द्रोण ने पूछा यह कैसे ?
तो उसने कहा आप को गुरु मान मेरे निरंतर अभ्यास का यह परिणाम है । 
तब गुरु ने अपने वचन की रक्षा हेतु कि अर्जुन ही सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर है , की लाज  रखने हेतु की अगर मै तुम्हारा गुरु हु तो गुरु दक्षिणा दो , परिणाम स्वरुप उन्होंने उसका दाहिना अंगूठा मांग  लिया , एकलव्य ने भी कटार से अंगूठा काट गुरु दक्षिणा स्वरुप दे दिया ,। 
तब गुरु द्रोण ने कहा किसी के निरंतर लगन व  अभ्यास  में किसी की कोई भूमिका नहीं हो सकती । 
*महाभारत में वनवास के समय अर्जुन शिव तपस्या को  चले जाते है , तपस्या के दौरान दुर्योधन का भेजा एक राक्षस  सुकर का भेष बनाकर उन्हें मारने दौड़ता है , तब अर्जुन उसे अपने गांडीव धनुष से मार गिराते है , साथ ही एक और तीर उस सुकर को लगता है , अर्जुन ने देखा वह एक किरात था ,जिसका भी तीर उसे लगा था , दोनों में इस बात को लेकर युद्ध होने लगता है , कि  पहले मेरा तीर लगा इसलिए ये मेरा शिकार हुआ । 
अर्जुन लाख चाहकर भी किरात को हरा नहीं पाता है । तब अर्जुन कहते  है,  आप कौन है , ? जिसके सामने दुनिया का सबसे बड़ा धनुर्धर भी कमजोर है ,। तब किरात बने शिव अपने वास्तविक रूप में आते है , कहते है ,तुम्हारी  सबसे बड़ी कमजोरी तुम्हारा अहंकार है , तथा अर्जुन को  पाशुपास्त्र  दियास्त्र देकर चले जाते है , । 

अर्जुन वहा  से फिर पांडवो अपने भाईओ  के पास चला जाता है , अब पांडवो को अज्ञात वास की चिंता थी , अर्जुन एक शमशान में जाकर एक वटवृक्ष पर अपने सारे दियास्त्र अस्त्र -शस्त्र  एक गठरी  में  बाॅंधकर उस बटवृक्ष पर छिपा देता है ,तभी इंद्र देव आ जाते है , अर्जुन से कहते  है , क्या इसी दिन के लिए इन्हे इंद्र लोक से जमा किया था , तुम्हारे द्वारा एकत्र किये गए ये अस्त्र -शस्त्र दिव्यास्त्रों का क्या औचित्य रह गया है ?तब अर्जुन कहता है , अपने स्वार्थ के लिए अपने धर्म को नहीं न छोड़ सकता , इंद्र चले जाते है , वहा  से पांडव राजा विराट के यहाँ नौकर भेष बन अज्ञात वास बिताने लगते है । 
     लेखक;- विचारक ....... रविकान्त यादव join me also on;- facebook.com/ravikantyadava













Monday, January 25, 2016

मै हूँ ??? (who am i )


१) विश्व में सबसे ज्यादा भोज्य व्यंजनों वाला देश है ?
२) कौन सा देश हर वर्ष सबसे ज्यादा फिल्मे और संगीत बनाता है ?

३) कौन अहिंसा का सन्देश व उसे धर्म बताने वाला पहला देश है ?

४)कौन सा देश है ,जहा कई प्रकिया से बने ठोस वर्तन सिर्फ एक बार उपयोग होता है , जिससे स्वाद में बढ़ोत्तरी होती है ?

५)कौन सा देश है, जहा वर्ष में अरबो रूपये  दान (मुफ्त) में मिलते है ?

६)कौन से देश में अमूमन बंदिशे थोपी नहीं जाती ?

७)किस देश का विज्ञान सबसे आगे था ?

८)कौन सा देश है , जहा एक कैलेंडर वर्ष में एक साथ सभी वातावरण फसले व ऋतुएँ पायी जाती है ?

९)किस देश में एक साथ  सभी धर्म ,सैकड़ो जाति व हज़ारो भाषाओ के लोग एक साथ रहते है ?

१०)कौन सा देश है , जहा नियम अमूमन जनता निर्धारण  करती है ?

११)किस देश ने शिक्षा हेतु सभी नियम सबसे पहले बनाया ?

१२)सबसे ज्यादा प्राचीन नगर , प्राचीन धर्म, व ऐतिहासिक भवन किस देश में है ?

लेखक;- भारतीय.... .......रविकान्त यादव  join me on facebook.com/ravikantyadava 






Sunday, January 24, 2016

मेरे अमर विचार part 6 (my immortal thought my way and my world )

* कुछ लोग जिंदगी को अपनी मानते है , और कुछ ईश्वर की देन मानते  है । 

* पक्का व्यापारी वर्तमान में जीता है । 

* कल्पना , कर्म , और काल पर ही सब कुछ निर्भर है । 

* यदि पैसा ही सब कुछ है , तो मुझे नहीं चाहिए सब कुछ । 

* मनुस्य के लिए दो ही विकल्प है , पहला ज़िन्दगी के लिए जीना  तथा दूसरा  जिन्दा रहकर जीना । 

* समाज में रहकर समाज के विरुद्ध नहीं जाना चाहिए । 
*पहले नाम के लिए  नहीं काम से पहचाना जाना चाहिए । 

* मिथ्या निंदा, ठीक अंगारो को अपने घर में फेकने जैसा है । 

* बुरे व्यक्ति से बात करते समय वो अपना परिचय देने लगते है , अतः अपने में सिमित रहो । 

* उत्सुक व्यक्ति ज्ञान में भी ज्ञान खोज लेता है । 

* जिंदगी जीना उससे सीखो जो जिंदगी को गुलाम बना अपने ही धुन में मस्त रहता है । 

* अच्छाई को खोजना पड़ता है ,पर बुराई सामने ही दिखती है, अतः पहला विकल्प ही समस्या है । 

*वर्तमान में हमारी नाराजगी कही भविस्य में हमें वही न बना दे इसलिए सोच कर वक्तव्य दे। 

* कभी अच्छाई बुराई को रोक देती है , तो कभी बुराई अच्छाई को वो हमारी शुद्धता और विवेक पर निर्भर करता है । 
* आरोप लगाने वाले व फालतू बकवास करने वाले अंधे ही नहीं , काले दिल वाले होते है , व अपने कर्म में (साथी )हमजोली की चाहत रखते है । 

* जिम्मेदारी एक ऐसा बोझ है ,जो ९०% लोगो को नहीं दीखता और इसी में देश के विकास का राज छुपा है । 

*अच्छाई आप के लिए ठीक है , परन्तु बुराई न आपके लिए ठीक है , न समाज के लिए । 

*जिंदगी के साथ चलना काफी नहीं है , दुसरो की जिंदगी के साथ चलना ,निभाना ही वास्तविक जिंदगी है । 

* स्वार्थी लोगो के लिए भावनाए किसी काम की नहीं । 
* सम्मान एक पुल के सदृस्य है , एक भी छोर न होने से अनायास परेशानी होती है । 

* समाज को दूसरे की भावनाओ के लिए बहुत कम समय होता है । 

* हमारी यादे हमारी पीछा नहीं छोड़ती जब तक उससे बेहतर कुछ न हो । 

*हसना और हसाना में उतना ही फर्क है , जितना जमीन और आसमान में । 

*विवेक से कार्य पर ,हानि नहीं होती । 

* आज़ादी हो तो अच्छा करने , अच्छाई के लिए हो वरना उस आज़ादी का कोई मायने नहीं । 

*वह व्यवसायी किस काम का   जिसकी गोपनीयता न हो । 

*क्षमा न करने योग्य लोगो के लिए कोई भी तरीका अपनाया जा सकता है । 

* हर व्यक्ति जीरो से आरम्भ होता है , और वही ख़त्म और फिर अगला व्यक्ति यही से आरम्भ और यही से ख़त्म, और फिर अगला यह क्रम परिवार में समाज में कड़ी  दर क्रम चलता रहता है । 
* सद्बुद्धि सौ दुखो की केवल एक मात्र दवा है । 
* जिंदगी एक सफर है , जिसकी ख्वाहिशे  बढ़ती जाती है , और मंजिले घटती जाती है । 

* महाभारत में पांडव जुए में हारकर १२ वर्ष वनवास और १ साल का अज्ञात वास भोग रहे थे , एक बार घूमते घूमते  पांडवो को प्यास लगी युधिस्ठिर ने छोटे भाई सहदेव को पानी लेने भेजा खोजते खोजते वह एक तालाब पर पहुंचे जैसे ही जल भरने लगे तो एक यक्ष की आवाज आई यह मेरा तालाब है , पहले मेरे प्रश्नो का जबाब दो फिर जल ग्रहण करो वरना मृत्यु को प्राप्त होगे , परन्तु सहदेव ने बिना प्रश्न के जल  ग्रहण किया जिससे सहदेव की मृत्यु हो गयी ,इस तरह एक एक कर सभी पांडव एक दूसरे को खोजते हुए वहा जाते है ,फिर वही शर्त इस तरह सभी बारी बारी से चारो पांडव मारे जाते है । 
अंत में सबसे बड़े युदिष्ठिर पहुंचे फिर वही आवाज़ युधिस्ठिर ने सभी प्रश्नो के सही जबाब दे दिए तब यक्ष ने कहा अब तुम यहाँ पड़े किसी एक को जीवित कर सकते हो , तब युधिस्ठिर ने नकुल का नाम लिया , तब यक्ष ने कहा तुम अपने सगे भाइयो को छोड़ नकुल को ही क्यों जिन्दा किया , तब उन्होंने कहा मैं अपने माता का ज्येष्ठ पुत्र हु ,तथा इस तरह अपनी छोटी माता के ज्येष्ठ पुत्र के भी जीने का अधिकार है । तब खुश होकर यक्ष ने जो की युधिस्ठिर के पिता धर्मराज थे ,जो उनकी परीक्षा ले रहे थे ने सभी को जीवित कर दिया , तथा कहा धर्म की राह में अपने परायो में अंतर नहीं देखा जाता । 
लेखक;- विचारक ......... रविकान्त यादव join me on facebook.com/ravikantyadava


Saturday, January 23, 2016

मेरे अमर विचार part 5 (my immortal thought my way and my world )

*आदर्श , मिशाल , मिशाल -,क्रांति, क्रांति-इतिहास और इतिहास सबक ,सबक- शिक्षा बन जाती है । 

*परिस्थितिया हमारी वास्तविक गुरु है , और कर्म हमारी परीक्षा । 

*ज्ञान , ताक़त  सही समय पर सही लोगो के लिए प्रयोग करना सर्वोत्तम है । 

*एक  थके और उदास चेहरे पर खुसी लाना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है , महानता पूछ कर नहीं आती अवसर बनाता है , परन्तु सदुपयोग ,विचार, ताक़त शक्ति, में जन  व जज दोनों की भागीदारी है । 

*यदि आपके साथ कुछ रुकता है तो वह स्वास्थ्य है , सो अपने स्वास्थ्य की देखभाल करे । 
* अपनी तरफ से अच्छा करने की कोसिस करना चाहिए बाकि भगवान पर छोड़ देना चाहिए । 


* सभी को अपनी कमजोरिया हदे मालूम होती है , और मै भी उनमे से एक हु और यह अच्छी बात है । 

*अपना मजाक बनवाना आसान बात नहीं होती । 


* जब आप किसी बिषय -सोच से परेशान हो तो तुरंत उससे जुडी सकारात्मक सोचे । 

* दुःख तो कही से भी आ टपकता है , फिर भी वही दुःख ,खुसी सांत्वना का जुड़ने का सूत्रधार बन जाता है । 

*एक सटीक कारोबारी या व्यवसायी वही है , जो साधारण वस्तु को भी विशेष अवसर पर विशेष बना कर बेच दे । 
*निर्माण में सौ साल लग सकते है , पर विनाश में सौ सेकंड भी नहीं । 

* अधर्म -धर्म पर भारी हो सकता है , पर उसे  हरा कर मिटा नहीं सकता । 

* झूठे इज्जत -प्रसिद्धि चाहने वाले, गंदे हथकंडे  अपनाने में कोई गुरेज नहीं करते । 

* जो सच्चाई से केवल अपने लिए डरते है , वो कायरो में कायर होते है । 

*ज्यादा सार्थक होगा दुनिया के शर्तो अनुसार जीयो । 

* नाकामयाबी परेशान करती है , वही कामयाबी हैरान । 

*अपनी जिंदगी आप आराम से जीये पर जिस दिन कोई विशेष दिन ,पर्व हो उस दिन जिंदगी आप को दुसरो के लिये प्रेरित करती है । 

* जिस तरह भूखा भोजन चाहता है , व उसका संग्रह रखता है , ठीक उसी प्रकार सतर्क चालाक व्यक्ति ज्ञान संग्रह करता है , ताकि समय पर इसका भव्य हित उपयोग हो । 

* अपना मूल्याङ्कन करने वाले मंजिल के करीब पहुंच जाते है । 

* सिखने को तत्पर को विशेष पढ़ने की जरुरत नहीं होती । 


* आज के युग में व्यापारी नजरो का भ्रम  उत्पन्न करते है । और नजरो को केवल अपने उत्पाद पर बाँध देते है ।इनके प्रचार प्रसार में केवल यही बेस्ट सर्वोत्तम होते है ,उपभोक्ता कुछ सोच नहीं पाता  और सरल विकल्प के रूप में इन्हे चुन लेता है । 

* अच्छाई तो सभी में होती है , पर पता न कैसे बुराई उन्ही पर भारी  हो जाती है । 

*लम्हों में जीना  ही दोस्ती की पहचान है । 

*उल्लुओ की पार्टी को ध्यान से देखना चाहिए क्या पता आप भी उनके जैसे हो । 

* निजी और अनदेखा स्वार्थ खतरनाक होता है । 

* लकीर का फ़क़ीर होने से कुछ नया आविष्कार नहीं आता । 

* तलाश और चाहत नहीं होती तो जिंदगी बेरंग होती । 

* बुरी संगत  में अच्छा भी दण्डित होता है । 

* समय से एक घंटा पूर्व पहुचने वाला ही कामयाब और सिखने में  सक्षम होता है , इन्हे दोहरा लाभ मिलता है , अतः ठीक ही कहा गया है , जल्दी का काम शैतान का । 

*जिस प्रकार संगीत में गायक या तो संगीत अनुसार गाता है ,या उसके अनुसार संगीत म्यूजिक बजता है , ठीक उसी प्रकार जिंदगी में व्यक्ति या तो अपने शर्तो पर जीता है , या सांसारिक शर्तो के साथ- साथ चलता है । 

* पढाई , कमाई , दवाई के अभाव में मनुष्य जीवन नीरस है । 

* खुश रहने के लिए ख़ुशी की तलाश जरुरी नहीं होती बल्कि खुसिया स्वयं में संचित होती है । 

* दुनिया क्या करती है , उसका अनुकरण उतना महत्वपूर्ण नहीं है , जितना की आप क्या करते है । 

* कार्य सफलता के लिए नियम बनाये जाते है , अतः उन्हें सार्थक होने तक देखा व परीक्षण किया जाये । 

* सपनो के अधिकतर उनके अपने पंख नहीं होते । 

* वादा  करने से अच्छा है उन्हें सार्थक करके दिखाना  ॥ 

* हिंदी स्वाभिमान की भाषा है । 
* जिस प्रकार एक भूखा दीन ,दान नहीं देता  ठीक उसी प्रकार दुर्जन स्वार्थी ज्ञान नहीं देते । 

* निभा कर दिखाना एक लक्ष्य का तब तक साथ रखना जब तक वह पूरा न हो । 

* रेत पर बुनियादे नहीं बनती । 

* दुसरो की मौत पर अपने जिन्दा होने का गुमान न करो क्यों की अगली पारी तुम्हारी है । 

* आज दो लोग बनाने वाले मिलेंगे तो बीस लोग आपको बिगाड़ने वाले मिलेंगे । 

* यदा कदा दुश्मन भी भूले -भटके काम आ जाते है । 

* जो बुरा हुआ उसे भुलाना आसान नहीं पर उसे भूलने से राहत जरूर मिलेगी , यहाँ अच्छा होना बड़ी बात है । 

* आँख , कान ,मुह  बताते है पहले सुनो समझो , फिर देखो  अंत में बोलो यही मानव सिद्धांत शिक्षा व ज्ञान है । 

* कोई भी शक्ति तभी तक अच्छी है जब तक वो दिमाग पर न चढ़े । 

*लगे रहना सीखना व भविष्य की सोचना आप को मंजिल के दरवाजे तक ले जाएगी । 

* सफलता अधिकांश दोनों तरफ से दुश्वारियां लेकर आती है , निजता समाप्त  । 

* हर मूड , उम्र और जीवन के लिए संगीत एक टॉनिक है । 

* किसी कार्य में दोस्त उतनी तेजी से नहीं आते जितने दुश्मन । 

* सोचते क्या हो , अच्छे के साथ अच्छा ही होगा , बुरा स्वयं बोता है स्वयं काटता है । 

* चमकता वही है ,जो घिसता है । 

*एकता कार्य को आसान और व्यक्ति को मजबूती प्रदान करती है । 

*बुरी  बातें सोचने से अच्छा है एक दो अच्छी बातें ही सोच लो ||

* तुम जो भी करो परन्तु यह जरुरु याद ध्यान रखना की तुम्हारी आत्मा की मौत न होने पाये |

* झूठ का कोई पाँव (आधार ) नहीं होता है , यह बात दर बात ऊपर उठता जाता है , पर पता न जाने कब धड़ाम से नीचे आ गिरे |

*सद्बुद्धि और सुवचन से बढ़कर कोई तप  नहीं |

*जिस प्रकार बिच्छू छूने पर डंक मार देता है ठीक उसी प्रकार  बुरे व्यक्ति लाख जतन  बाद भी बुरे ही रहेंगे |

* व्यक्ति की महानता उसके कामो ,कर्मो से बनती है , काम खत्म महानता ख़त्म |

*ये  सही नहीं है, वो सही नहीं है , आदि प्रश्नवाचक से ज्यादा अच्छा है , कि कम  से कम मै तो सही हु |

* माफ़ी मांगना अच्छी बात नहीं है , कोसिस हो ये नौबत ही न आये |

* गलत शक्तिया अच्छी को गलत रस्ते पर आने को मजबूर कर सकती है , पर अच्छे उन्हें नहीं , अच्छे लोग उन्हें दबाब मुक्त रखते है |

*साधु संत महात्मा होने, दिखने से अच्छा है , एक इंसान होना, नेकियों से निहित होना |

* हमें समय की सलाह माननी चाहिए |

*आज के समय में मदद उन्ही की करनी चाहिए जो इसके हक़दार हो व मदद मांगे |

* ज्ञान गिलास में रखा कोई शरबत या पानी नहीं है , जिसे झट से पी  जाया जा सके , ज्ञान एक बीज है , एक यात्रा है , एक तपस्या है |

*ज्ञान प्राप्ति के लिए विनम्र होना बहुत जरुरी है , यदि आप विनम्र नहीं है , तो ज्ञान के हकदार नहीं है , और यह आप नहीं सीख  सकते ||

* अच्छाई अगर दफ़न भी हो जाएगी तो वहा से एक पौधा उग आएगा परन्तु मै यह नहीं बता सकता वो पौधा या पेंड कौन सा होगा |

* कोई भी कार्य बड़ा , छोटा नहीं होता व निर्धारण नहीं करता व्यक्ति अपने विचारो व सिद्धांतो से बड़ा छोटा होता है , ये मुझे राजा हरिश्चंद्र व संत रविदास ने सिखाया है |

*गलत व्यक्ति जाले में उलझे मक्खी की तरह होते है , जितना छूटने के लिए हाथ पाँव मारते है ,उतना ही उलझते जाते है |

* ज्ञान और कर्म ,पैसा रेल की दो पटरिया है , उस पर चलने वाली रेल जीवन है , वही जुड़े डिब्बे सम्पूर्ण प्राथमिकताये है |

* कभी -कभी हमारी भावनाए हमारी इच्छाओ कर्तव्य पर भारी  पड जाती है |

* अगर आप प्रसिद्द होना चाहते है तो समाज और बच्चो के लिए अच्छा करे |

* पवित्रता केवल नाम ही काफी है , जैसे गंगा , पर आचरण पर , यह केवल अहसास की भी जरुरत नहीं है |

*महाभारत में देवराज इंद्र भेष बदल कर सूर्य पुत्र कर्ण  से उसका अजेय अद्वितीय कवच और कुण्डल मांगने जाते है , वे जानते थे कर्ण  महादानी है , उनके जाते ही कर्ण उन्हें पहचान जाता है , तब इंद्र कहते है , हे महावीर तुम मेरी असलियत जानते हुए भी अपने दिव्य कवच कुण्डल को शरीर से काटकर मुझे क्यों दे रहे हो , कर्ण  कहता है , दान देना  मेरा कर्तव्य है , इसके बावजूद यदि दान में लोभ  मिल जाये तो वह किसी योग्य नहीं रहता । 


*बोलो उतना ही जितना तुम स्वयं सुन सको । 

*जो व्यक्ति सही होगा वो दूसरे के उकसावे पर गलत नहीं होगा न दूसरे को अपने गलती का कारण बताएगा । 

*देश के विकास के लिए पैसे कम  व निष्ठा  ज्यादा खर्च करना पड़ेगा । 

*  सच्चाई स्वीकारने वाले ,गलती मानने वाले विरले ही होते है । 

* जीवन का मर्म, पाने  के लिए बहुत कुछ है , पर खोने के लिए कुछ नहीं । 
* गिराने वालो का तो जमाना है , ये बहुतायात है , परन्तु उठाकर गले लगाने वाले देवतुल्य हो जाते है । 

* अगर हम धर्म के मार्ग पर नहीं चल सकते तो कोसिस करने में क्या है । 

* कुछ दोस्त दीखते अच्छे है , बिलकुल नदी की तरह परन्तु कब नदी में स्थित मगरमच्छ बन कुछ पैर खीच ले  जाय यह बता पाना असंभव है । 

      लेखक;- विचारक....... रविकान्त  यादव join me on ;-facebook.com/ravikantyadava 

Friday, January 15, 2016

मेरे अमर विचार part 4 (my immortal thought my way and my world )

*गलती हमारी जुबान करती है , दर्द हमारे दिल को होता है , व  शिकायत हमारी आँखें करती है ,अतः कह सकते है ,किसी एक की वजह से तमाम लोग पीड़ित होते है । 

* सोच  व कर्म के जरिये हमारे अस्तित्व का निर्माण होता है । 

*कानून तभी तक सार्थक है , जब तक इसके रखवालो को भी इसका डर हो , और वो अपने सीमा में रहे । 

* ताक़त पर नियंत्रण न होने पर वह आत्मघाती होगा । 

*रोज चमकने वाले सूरज भी ग्रहण से अंधकारमय हो जाता है , अर्थात सौ अच्छाई पर एक बुराई भारी पड़  जाती है । 

* हमारा वर्तमान हमारे भूत से जुड़ा  हुआ है ,जो नजरो का भ्रम है , दीखता नहीं , भविष्य हमारे कर्म ,ज्ञान, समझ , वर्तमान से स्वयं का ढांचा बुनता है । 

* अगर एक सरकारी शिक्षक  अपनी तपस्या का १० प्रतिसत भी उदारता के साथ ज्ञान दे तो  देश के बेहतर  भविष्य को कोई नहीं रोक सकता । 

* घोर कांटो वाले बेर , बेल, भी अच्छा फल देते है , अतः सारा फेर नजरो का है , अतः दरिया दिल होना चाहिए । 

* दिल महसूस करने की क्षमता प्रदान करता है , यदि आप अच्छे बुरे में फर्क महसूस नहीं कर सकते तो आप इंसान नहीं है , क्यों कि  स्वार्थी दिमाग आपको नचाता रहेगा , अंततः  जाएगा । 

* दिल में नेकी हो तो वह कार्य आसान बन जाता है । 

* एक थके उदास चेहरे पर खुसी लाना बहुत बड़ी बात है । 

* गुड की असली मिठास तो उसके बधने में है । 


* महानता पूछ कर नहीं  आती ,अवसर बनाता  है । 

* सिखने और सिखाने की कोई उम्र नहीं होती है , हर उम्र में चुनौतियां है । 

* हमारे भाग्य में क्या लिखा है , ये कोई नहीं जानता , परन्तु हम भाग्य में क्या लिख सकते है , ये सभी जानते है । 

* कोई जरुरी नहीं की शेर के बच्चे शेर ही बने , शेर बनने के सपने में वो बिलार बन जाते है । 

* शाप दिया भी जा सकता है।  और लिया भी पर गलत भावना से शाप उल्टा असरकार आप के पास ही लौट आता है । 

*किसी का मजाक बनाने वाले अपने को छिपाने वाले , होते है , उनके लिए निंदनीय , शर्म , और गिरी हुई बात है । 

*कुछ बनाने के लिए कुछ समझना बहुत जरुरी है । 

* प्रतिशोध लेने से पहले सोच लो क्या तुम इसके काबिल हो ,शायद नहीं । 

*अँधेरे में परछाई भी साथ नहीं होती अतः दिशाहीन नहीं होना चाहिए । 

* तुम्हे क्या चाहिए , सोचो क्या तुम ,वास्तव में उस योग्य हो दिल की धड़कनो को आँखे बंद कर सुनो अगर वह सुनाई दे तो , तुम्हे जो चाहिए मांग लो , वह समय के साथ अवशय पूर्ण होगी । 

*न मै गलत हु न आप तो फिर ऐसी कोई ताक़त नहीं जो आपको और हमें मिलने से रोक सके । 

* क्यों हतोउत्साहित  होते हो , नदी का रास्ता तमाम पत्थर ,व घुमाव रोकते है , परन्तु उसकी पवित्रता भंग  व राह  रोक नहीं सकते , दुनिया वाले तमाम तरह से तुम्हे परेशान कर सकते है , परन्तु ध्यान रहे तुम एक नेक काम के लिए जा रहे हो इसकी पूर्णता तक तुम्हे कुछ नहीं हो सकता , यह तुम्हारे भस्िय में यश का मार्ग है , यदि कुछ होता भी है , तो तुम्हे ईश्वरीय सानिध्य प्राप्त होगा , यही पवित्र जीवन की नियति है , उठो और स्वार्थ रहित नेक कार्य की तरफ कदम बढ़ाओ । 

* हर युग में रावण होगा तो राम भी होगे । 


* महाभारत में शाप पाने के बाद राजमहल छोड़ पाण्डु जंगल में रहने लगते है , पर शाप से पीड़ित  परेशान , व्याकुल पाण्डु  , ने देखा कुछ महात्मा लोग कही जा रहे है , उन्होंने पूछा आप लोग कहा जा रहे है , कृपया मुझे भी साथ ले ले , तब महात्मा लोगो ने कहा "हम लोग इंद्र के दरबार में भोज खाने जा रहे है " तू वह नहीं जा सकता , क्यों की ? तू पुत्रहीन है , और पापी भी पाण्डु विलाप करते   हुए वापस आ जाते है , बाद में वो पांडवो के पिता कहलाये अतः समय सबसे बड़ा शिक्षक है । 

* एक लकड़ी से दूसरे लकड़ी को काटना असंभव के आसपास है । 

* अच्छाई के लिए त्याग किया जाता है , व बुराई  के लिए परित्याग । 

*ईश्वर ने बहुत सोच समझ कर मानव शरीर दिया है , अतः ईश्वर उन्ही का साथ देता है , जिनमे कर्म करने की क्षमता हो । 

* आपको जो बनना  पहले उसके अनुसार ढलो अपना आकर निश्चित करो क्यों की एक निश्चित आकार के बर्तन को भरने पर और नहीं भरा जा सकता । 

*समझदारी जानकारी से अच्छा दोस्त कोई दूसरा नहीं है । 

* प्यार एक ऐसी ताक़त है , जिसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है । 

* आज यदि आप पैसा रखो तो अपनी सुरक्षा भी रखो । 

*प्यार , पैसा , प्रतिष्ठा  तीनो को बना कर रखना जीवन में उपलब्धि वाली बात है । 

* नाली का कीड़ा नाली में ही मौज़ करेगा रहेगा , अतः उसी प्रकार गंदे लोग बुरे विकल्प में ही मज़ा पाते है । 

* दुनिया कर्म और प्रेम पर चल रही है । 

*तन्हाई हमें अपना मकसद बता देती है , । 


*झुण्ड से बिछुड़े पक्षी को बदहवास उड़ते चिल्लाते तो सभी ने देखा होगा पर वह क्यों बिछड़ा यह बहुत कम ही जानते होगे । 


* अच्छे लोग होते है , और बिना किसी स्वार्थ , पहचान , उपकार के आपको अचानक मदद भी करते है । 

* मज़बूरी जताने वाले आत्म निर्भर विजेता नहीं बन सकते । 

* वह परिपक्वता किस काम की जब जीने -जीलाने की खुशिया ही न रहे । 

* अपना कार्य स्वयं करने करने की काबिलियत हो ,वरना अपना चारा तो जानवर भी ढूंढ लेते है । 

*क्या एक साथ दो नावों की सवारी संभव है , हां जब दोनों एक साथ बंधी हो परन्तु कुछ समय बर्बाद जरूर जायेगा । 

*किसी  चीज़ को पाने की जरुरत हो , पागलपन नहीं । 

* जीत आपको मौके देती है , कई मौके नहीं । 

* आज़ादी हमें सोचना सीखा देती  है । 

*शांति में अन्य बाधा खलने लगती है । 

* तुम किसे ढूंढ रहे हो , मै तुम्हारे आस- पास हु  बस तुम्हे अपनी नजरो पर भरोसा कर लम्हों व कर्म में उतरना  होगा । 

*अमर होना बहुत छोटी बात है , क्यों की पहले जीना  सीख  लो । 

* अभाव हमें तपस्या करना सिखाता है ,और सच्चे कर्म को प्रेरित करता है । 

* किसी दशा में ईमान से समझौता नहीं करना चाहिए इसे बरकरार रखना दुर्लभ शक्ति है । 

* देश क्या है , उत्तर होगा देश हम है । 

* हम भारतीय पत्थरो पर सर नहीं झुकाते उस पत्थरो में बसने  वाले  अडिग, अटल, कठोर सिद्धांतो के आगे सिर झुकाते है । 

* जीने के लिए शांति की जरुरत होती है , और शांति के लिए मौत की । 

* आज तुम जो भी हो अपने पिछले कर्मो की वजह से । 

* अच्छा बनने का मन्त्र है  , मै तुम्हारे जैसा नहीं हु , क्यों की मै तुमसे अच्छा बेहतर बनुगा । 

* विद्या देने  में कंजूसी वाले सिमित हो जाते है । 

* भारत एक ऐसा देश है , अगर कोई त्यौहार रविवार को पड जाये तो त्यौहार का मज़ा ही बिगड़ जाता है । 

* देश का विकास शर्तो पर नहीं होता , जूनून व देशभक्ति से होता है । 

* ह्रास हर व्यापर का निकटतम सम्बन्धी है । 

* युगो बदल जाते है ,पर प्रेम वही का वही रहता है । 

*मै भूत हु ,वर्तमान हु, और भविष्य हु , मै ही राम हु मै ही रहीम हु क्योकि इसका कारण ये है , मै तुममे  हु और तुम मुझमे हो । 

*शायद दोस्ती की मिठास से मीठा कुछ भी नहीं है , शहद भी नहीं । 

* हम यहाँ जीने आए है मरने नहीं तभी तक जब तक अच्छे कार्य करे । 

* अच्छे व्यक्तियों के लिए अपना ही धर्म समझने में जीवन बीत जायेगा दूसरे धर्म की तो बात ही छोड़ दे । 

* यदि आप बुरे है तो अपने उसी काम के लिए एक नौकर रख ले । 


* मेहनती लोग इज्जत के काबिल होते है । 

* गाँव , शहर , राज्य या देश की बागडोर आपको मिले तो बड़ा दुःख होगा क्यों की सके लिए २४ घंटे सोचना ही नहीं वरन कार्य भी करना पड़ेगा । 

* कभी कभी शांति आत्मघाती साबित हो सकती है , चाहे वह वर्तमान हो , तुलना हो, नज़ारे हो , या फिर हितकर भविस्य हो । 

* कुछ लोग यह नहीं सोचते उन्हें कौन सी ट्रैन पकड़नी है , क्या फर्क पड़ता है , कही न कही तो पहुंच ही जायेगे 
लेखक;- विचारक......... रविकान्त यादव join me on facebook.com/ravikantyyadava