Sunday, August 14, 2016

क्या ? ( what ?? is protection ) HAPPY 70th INDEPENDENCE DAY


वैसे तो हमारा भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी सेना है । यहाँ शहीदों की कमी  नहीं है ,। 
पर क्या शहीद होना जरुरी है ,?



 समय व वेतन के साथ साथ हमें extreme technology भी जरूर चाहिए । 
१) क्या हमारे पास उन्नत गैस मास्क है ।

२) क्या हमारे पास उन्नत आपात सेना के लिए डॉक्टरी सेवा है । 


३) क्या हमारे पास बुलेट प्रूफ सेना ट्रक  है । 

४) क्या हमारे पास ड्रोन है ,?( without pilot )

६) क्या हमारे पास हाइड्रोजन बम है ?


७) क्या हमारे पास राडार से बचने वाला ख़ुफ़िया विमान है ?

८) क्या हमारे पास ड्रोन में ही उन्नत गोली बम रोधक कवच है ?


९)क्या हमारे पास नाईट विज़न रात में देख सकने वाले चस्में है ?

१०) क्या हमारे पास कमांडो ट्रेनिंग अमेरिका व चीन से ज्यादा कारगर है ?

११)क्या हमारे पास बन्दूक जो लेज़र व दूरबीन व bend की काबिलियत के साथ उपलब्ध है । 





१२) क्या हमारे पास 6  हवा में ही भेदने की शक्ति वाली एंटी मिसाइल है ?



१३) क्या हमारी सेना के पास आधुनिक अस्त्र सस्त्र अपडेट होते है ?



१४) क्या सेना के सारे मिग विमान दुर्घटना ग्रस्त हो गए है , या कुछ बचे है ?

१५) क्या हमारे पास ६ पनडुब्बी है , जिनके पास जल  से जल तक मारक क्षमता है ?


१६) क्या हमारे एक रूपये की कीमत एक डॉलर के बराबर है । 
१७) भारत विस्व का ७ वा सबसे बड़ा क्षेत्र फल वाला देश है , फिर भी पिछड़े होने का कारण क्या है ?
१८) क्या हमारे पास लेसर गन है ?









१९) क्या हमारे पास बुलेट प्रूफ जैकेट है ? 

अंत में यही की हमारी सेना सियाचिन ग्लेशियर जो विस्व का सबसे ऊँचा व दुर्गम रणक्षेत्र है , जहा  १० हज़ार  सैनिक तैनात है ,तथा एक दिन का खर्च 5 करोङ रूपये आता है । 
फिर भी यहाँ रहना मौत के मुह में रहने के बराबर है । मुह से निकली हवा तक जम  जाये ,हाल ही में शहीद सैनिक हनुमनथप्पा सहित 10 सैनिको की घटना याद करने की जरुरत है । 

ये लोग बताते है , जिंदगी जीने के लिए नहीं है , यह एक कर्तव्य है , जिसे निभाकर तुरंत शांत भाव से पथ प्रदर्शक बनना चाहिए ।। 

लेखक;- क्या!!!क्यों ........ रविकांत यादव the kent 
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Monday, August 1, 2016

मार्ग ( way )

एक भक्त 3 किलोमीटर जाकर भगवान् को उनका प्रिय पुष्प अर्पित करता , उसकी तपस्या पूर्ण हो चुकी थी , परंतु भगवान  थे की आने को ही नहीं रहे , वह पत्थरो पर सर मारता फ़रियाद करता , मेरे पुष्प अर्पण में क्या कमी रह गयी ?
भगवान तुरंत आ गये , बोले हे भक्त , मुझे पाना चाहते तो वही पा जाते जहा से तुम ये पुष्प तोड़ लाते हो , परंतु तुम ब्यर्थ के आडम्बर में फँसे  रहे । 
मैं उन पुष्पो के मुस्कान में था , वहा उड़  रही तितिलियो में था , वहा मंडराते  भवँरो में था , उस बगीचे के पेंड़ो , पत्तियो, छायाओ , फलो, पक्षियों , सुगन्धित हवाओ में था , मैं पल -पल तुम्हारे साथ भी था , । 
परंतु तुम तो व्यर्थ कर्म कांडो में पड़े रहे , एक भक्त से कीमती भगवान् के लिए कुछ नहीं होता ।। 

प्रश्न है , ईश्वर की बनाई दुनिया में उसे ही हम क्या अर्पण करे ??
बस नजरिया  और भावना होनी चाहिए । 
ईश्वर प्रत्येक जगह है , प्रकृति व जीव जंतु हेतु सेवा , दया , परोपकार, सम्मान ,  कर्तव्य  ही ईश्वर को पाने का मार्ग है ॥ 

लेखक;- जीवन मार्ग से........ रविकान्त यादव 
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