Saturday, January 25, 2014

देश की प्रगति का 65 गणतन्त्र (developing country india )

जब देश परतंत्र था ,तो घोड़े की टापे कभी भी रात विरात  किसी भी भारतीय की नीदे ख़राब कर देती थी , आज देश स्वतंत्र है ,। तो वही आज हूटर , सायरन की  आवाज़ जनता का ध्यान भंग करती है । 
राह चलते परेशानी । इस देश में लोकतंत्र संविधान को ध्यान रख कर सभी को समांन अधिकार हो , भारतीय तो भारतीय, सभी में एकता हो और इसके लिए  कार्य हो , मै  बत्ती वालो का विरोधी नहीं हु , मैंने पेपर में पढ़ा रैली के जाम और तमाम नियमो से एक बीमार विद्यार्थी एम्बुलेन्स में ही दम तोड़ दिया ॥ 


जो कार्य २० साल पहले हो जाना चाहिए था, होता है ,अब ,।  जो नहीं होना चाहिए था होता है ,उलट जैसे महगाई और भ्रस्टाचार ,क्या आपको ज्ञात है , आजादी 1947  में रुपया और डॉलर एक सामान थे , आज डॉलर रूपये से 62 गुना अधिक है । क्यों और कैसे ???????

हमारे देश कि प्रगति न होना सबसे बड़ा कारण  है ,कर्तब्य में कमी,बैठे, पैसे डकारना , जनता का शोषण जिससे गरीब भूखे मरे और ऊँचे  लोग उनके खून चूसकर मखमल के कार्पेट पर चले । 

हमारा देश सिर्फ आर्थिक ,तकनीकी व राशनिक कमजोर ही नहीं है ,। वरन यह एक सामाजिक कमजोर भी है । 
और य़ही कारण  है ,देश कि प्रगति न हो पाना , किसी को देश के लिए सोचना ही नहीं है । जो हो   रहा है ,होने दो बचे कूचे जो दो -चार गिने चुने  देश भक्त है, तो ,उनकी सुने ही कौन ?

बस जिंदगी है तो इसे एन्जॉय करो , क्या, मै पुछता  हु -हमारे बापू जी ,नेताजी ,आज़ाद ,व भगत सिंह जी आदि ने अपना जीवन आनंद हेतु व्यतीत किया था ?
हमें एक भावी भविष्य कि रचना करना है ।और उन नाती -पोतो को आशीर्वाद हेतु हमारे हाथ का सहारा होगा । अब आप ही बताये अन्य देश जो कि इतने ही वर्ष में हमसे कही आगे है । क्या हमारा देश अन्य देशो कि अपेक्षा प्रगति पर है ?। जरुरत है ,एक ऐसा साफ़ -सुथरा रास्ता बने जिसके अगल बगल फूल लगे हो और जनता हाथो में हाथ लिए गाते मौज से उस रस्ते से गुजरे यह रास्ता दिल्ली का राजपथ न होकर वसूलो सिद्धांतो व देश में शांति और खुशहाली  का रास्ता हो । 
तभी हमारा देश विकसित होगा । 
इसके लिए यह भावना हो कि ,न मै हिन्दू हु ,न मुसलमान हु ,न सिख, न ईसाई , न ब्राह्मण हु, न राजपूत हु न अन्य , मै  हु ,इस देश का देशभक्त , जिसकी खून की हर बूँद से एक स्वच्छ और स्वर्ण सी सामाजिक लहलहाती फलस उत्पन्न हो। ……। 
लेखक ;-फिर से प्रयासरत , देशभक्त .... रविकान्त यादव