Monday, February 21, 2011

तुम्ही मेरे मंदिर -खानदान

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विश्व कप -क्रिकेट (महाकुम्भ )


 क्रिकेट का सबसे बड़ा महाकुम्भ इस बार ३ एशिया ई देश मिलकर आयोजित कर रहे है ,भारत ,श्री लंका ,और बांग्लादेश , मुझे इस बार सबसे मजबूत देश जो की दावेदारी पेश कर रहा है, वो है श्री लंका , कमाल के गेंदबाज़ है ,इस टीम में ,भारत दूसरा है ,वैसे यह खेल अनिस्चितो से भरा रहता है ,कुछ कहा नहीं जा सकता ,क्रिकेट विश्व का एक मात्र खेल है ,जो सबसे लम्बे  अवधी तक चलता है ,एशिया में यह खेल से बढ़ कर है ,दीवानगी है ,जूनून है ,और इसके सबसे ज्यादा दीवाने यही है ,अफ़सोस अन्य ताकतवर देसों की तरह चीन भी इसे  कोई खास   तवज्जो नहीं देता , हर खेल की तरह यह भी दिल और दिमाग का खेल है , आईये जानते है ,क्रिकेट की बारिकिया, बाहर से अन्दर आती ,और अन्दर से बाहर की तरफ अचानक घुमती ,झूमती  गेंदे खतरनाक होती है , जैसा ,  वार्न, मुरलीधरन और तेज गेंदबाज़ अफ्रीका के स्टेन करते है ,
6 गेंद 6 तरह फेकना एक गेंदबाज़ की सबसे बड़ी कामयाबी होती है ,
कुछ गेंदबाज़ ऐसा करते है कि,गेंद बल्ले पर न आये और कैच हो जाये ,
ऐसे गेंदबाज़ सफल रहते है ,जैसा हरभजन करते है ,अंतिम दम तक लड़ो ,तेज़ गेंदबाज़ तेज़ी और मौका देखकर गेंदबाजी करते है ,और बल्लेबाज़ कि काट देखकर ,
ग्लेन मक्ग्रा अपने गेंद पर बल्लेबाज़ को कभी पार पाने ही नहीं देते थे ,विशेषकर उचाई से ,वो सबसे किफायती गेंदबाज़ रहे है ,सबसे कम सिक्सेर जाने नहीं देने वाले गेंदबाज़ है ,
यदि तेज़ी के साथ turn करने कि काबिलियत रहे तो कोई बल्लेबाज़ नहीं टिक सकता ,कुछ चतुर गेंदबाज़ शरिर देखकर गेंद फेकते है ,गेंद बाजों को ऑफ और middle स्टंप पर गेंद रखे ,मसाज ले , स्वस्थ्य रहे , जिद के साथ गेंदबाज़ी न करो देख परख कर गेंद फेको ,यदि सोएब अख्तर चार सनसनाती गेंद के बीच एक बौंसर ,योर्कर ,या middle फेंके जैसा कि मलिंगा करते है ,गेंदबाज़ का साथ केवल fielder निभाते है ,लेकिन तेज़ गेंदबाज़ कि परवाह न करने वाले ही ,विजयी है ,
पहले बल्ला पीछे सरीर कि तत्परता ,नज़रे ज़माना ,बाहर भागती अन्दर आती गेंद से सीधे या तिरछे बल्ले कि तकनीक ,बेझिझक प्रहार जैसे सहवाग ,थकान से दूर ताकत और फटाफट निर्णय लेने की कला क्रिकेट के हीरो होते है ,एक खिलाडी को दिमाग में विजली जैसी तत्परता  उसके सरीर में आ जाये तो वह अजेय होगा जैसे सचिन  रमेश तेंदुलकर ,महेंद्र सिंह धोनी विश्व के एकमात्र cricketer है , जो अपने नाम के साथ जी और खेल रहे है ,अब तक का सबसे योग्य  कप्तान ,जाक्स kallis अफ्रीका के दुर्लभ खिलाडी है ,अफ्रीका में जूनूनी खिलाडी रहते है ,और सचिन केवल क्रिकेट के लिए बने है ,लोग उनसे प्रेरणा लेकर खेलते है ,वर्ल्ड कप में कपिल देव की पारी सहवाग और युसूफ पठान  खेल सकते है , अब तो पीच और footage देखकर भी कोच और कप्तान लोग रणनीति बनाते है ,यदि एक बल्लेबाज़ का फूट वर्क अच्छा है ,तो दुनिया का कोई गेंदबाज़ कुछ नहीं कर सकता,५-६ छक्के सिक्सेर  ही मैच का रूख मोड़ देगे ,ये काम पुछल्ले  करे तो ज्यादा हितकर होगा ,कप्तान नहीं दोस्त और ज़ल्लाद बनकर खेलो , विश्वास के साथ कदम रखो ,बारीकियो को ग्रहण करो और अजेय और अमर बन जावों, चौतरफा ,बहुमुखी खेल दिखावो ,गेंद ,बल्ले ,fielding मनोविज्ञान ,रणनीति के फेल होने पर हतासा ही हार है ,
जान लड़ा कर  खेलो प्रतेक खिलाडी अपने आप को one man आर्मी समझे और विजय प्राप्त करे , पत्थर की पीच हो या बाल, बाल देखकर खेलो ,और कौन सी बाल पर क्या करना होगे सोचे रखो ,
कुछ व्यक्तिगत अमर रिकॉर्ड ;-
लारा ४०० रन टेस्ट *,
सचिन २०० रन एक दिवसीय **
बेस्ट गेंदबाज़
मुरलीधरन ८०० विक्केट टेस्ट ,
मुरलीधरन ५१९ एक दिवसीय अभी ****
सबसे बड़ा स्कोरिंग मैच में जीत के साथ austraila ४३४ साउथ अफ्रीका ४३८ बनाकर जीता ,
बेस्ट allrounder jackes kallis **
best wicket कीपर  महेंद्र सिंह धोनी  **
मेरी वर्ल्ड कप की टीम 
१,सहवाग ,२,गंभीर ३,सचिन ४,रैना /रोहित शर्मा ५,धोनी ६,विराट कोहली /युसूफ पठान ७ ,युवराज सिंह ८,हरभजन ९,ज़हीर खान १०,चावला /प्रज्ञान ओझा ११,मुनाफ /नेहरा /श्री संत
अन्य ;- सौरभ तिवारी ,प्रवीण कुमार , अश्विन कुमार 
मेरी शुभ कामना की ११ किलो का सोना हमारा हो ,
लेखक ;- दर्शक 
रविकांत  यादव ....एम् कॉम २०१० 



Friday, February 18, 2011

संगीत -कान्हा आन पड़ी मै ...

संत रविदास







आज संत रवि दास जी की जयंती है ,और आज माघ पूर्णिमा का प्रमुख स्नान भी है , संत रविदास एक महान संत माने जाते है ,उनका मंदिर जन्म और कर्म स्थान हमारे वाराणसी में ही है ,जिसका प्राचीन नाम बे-गम पुरा है ,जिसका अर्थ है ,जहा गम न हो ,आज ये स्थान कृष्ण के नाम के साथ जुड़ कर सीर गोवर्धन पुर हो गया है ,मै इस स्थान पर बहुत पहले से जाने की हसरत पाले हु पर आश्चर्य अभी तक जा नहीं पाया ,संत रविदास द्वारा ज्ञान ही नहीं कर्म को महत्व देकर उसे पूरी निष्ठा से निर्वहन करना कोई उनसे सीखे ,वो कहते थे मन चंगा तो कठौती में गंगा उन पर पूरी की पूरी फिल्मे भी है ,जिसमे रानी के सोने की  कंगन की कथा है ,उनकी अमृत वाणी आज भी हमें सन्देश देती है ,

एक बार श्री कृष्ण वेष बदल कर रविदास जी से मिलते है ,कहते है महात्मन आप को यह जुते चप्पल का कार्य शोभा नहीं देता , 
रविदास जी कहते है ,मनुष्य के रूप में ही कही भगवान ही मेरे पास आ जाये तो उनके पैरो के धुल स्पर्श से बड़ा और क्या सौभाग्य होगा ,जब पत्थर को स्पर्श से मोक्ष मिल सकता है ,तो मै तो ईश्वर का कार्य कर रहा हु , थके हारे पधारे की सेवा भी हो जाती है ,वैसे भी लोग कितनी आशा लेकर मेरे पास आते है ,उन्हें मेरे कार्य में ख़ुशी मिलती है और मुझे उनको खुशी देखकर खुशी मिलती है ,वैसे भी प्यार और आशा से पास आये व्यक्ति को मायूस करना एक बहुत बड़ा पाप है ,मै वह पाप नहीं कर सकता ,यदि आज कही पाप है ,तो पुण्य आत्मा भी होगी ही ,शांत श्री कृष्ण रवि दास जी को ब्रह्माण्ड का सबसे कीमती पत्थर (पारस) देने का विचार कर प्रणाम कर फिर दोबारा आने को कहकर चले जाते है ,
संत रविदास जी के लिए ;-
मन चंगा  गंगा सा निर्मल ,
प्यासे पथिक के लिए बन गए जल ,
सत्कर्म करना ही है जीवन का हल ,
प्रेम तो है ही ,ऐसी आस्था ,बस इसे बहने दो अविरल ,

लेखक ;-हार्दिक नमन 
रविकांत यादव  एम् कॉम .२०१०