Tuesday, August 30, 2011

हज (story with life time song use headphone)






ईद इस्लाम धर्म का सबसे बड़ा पर्व है , इसमें मुस्लिम बंधु महीने भर व्रत -उपवास रखते है,इस रमजान के पाक महीने में नर्क के दरवाजे बंद कर दिए जाते है,| यानि स्वर्ग का सम्मान मिलता है,| ईद पर चाँद देखना इस बात का संकेत देता है, कि इमान पर दाग न लगने दो |
अमिन एक गरीब व्यक्ति था ,परन्तु अल्लाह के करम से मेहनत-मजदूरी कर कुछ पैसो से जीविका चला लेता था,उसकी इच्छा थी ,किसी तरह पेट काट कर हज करने के लिए भी पैसे इकठ्ठा करता , धीरे -धीरे कुछ पैसो का इंतजाम होता गया ,हज के लिए समूह जत्था रवाना हुआ वह भी उस टोली में शामिल हो गया, पुरे ख़ुशी और उत्त्साह में काफिला चल पड़ा ,रास्ते में गया तो उसे एक वृद्ध व्यक्ति मिला जो शरीर से गला , भूख से व्याकुल अपने साथ लेने का आग्रह करता सभी उससे मुह फेर लेते है| पर आमीन से उसके अन्दर के दर्द -तड़प -व्याकुलता को सहा न गया ,उसने अपना सभी हज का पैसा व हाजी नाम उस बुड्ढे को देकर घर चला आता है,| आँखों में आंसु लिए वह अल्लाह को याद करते भूखे पेट सो गया,|
 रात में उसे सपना आया खुदा कह रहे थे ,अमीन तुम मेरे सच्चे हाजी हो, दुसरो के दर्द में अपना दर्द खोजने महसूस करने वालो को मै कभी निराश नहीं करता||
दुसरे दिन हडबडाहट -घबराहट में उठा अमीन अल्लाह का शुक्रिया अदा कर जैसे ही ,कपडे की आलमीरा से जुम्मे की नमाज़ के लिए टोपी लेने के लिए आलमीरा खोलता है,उसे मक्का -मदीने की तस्वीर और सोने के
सिक्को से भरी एक पोटली पड़ी मिलती है,|अब वह अल्लाह का लाख -लाख शुक्रिया अदा कर आँखों से आंसु बहा    रहा था,| क्यों कि उन आंसुवो पर उसका स्वयं नियंत्रण नहीं था ,|

 
लेखक;- भाईजान .......रविकांत यादव 


Sunday, August 21, 2011

NOTICE

STILL BLOGGER SERVICE IS  NOT UNIQE ......

रण-संग्रह


भरत वंश का सबसे बड़ा युद्ध होने को था ,| कौरवो -पांडवो का युद्ध  निश्चित था, जोड़ तोड़ चल रही थी ,पांडव कृष्ण के यहाँ जाने का विचार करते है ,दुर्योधन पहले ही वहा कृष्ण के यहाँ पहुच जाता है,कृष्ण सो रहे थे ,दुर्योधन यह देखकर सिरहाने बैठकर सोचता है, मेरी आपको जरुरत पड़ेगी , अतः कृष्ण सोते रहते है, तभी पांडव-अर्जुन आते है, वह पैर की तरफ बैठकर सोचते है, मुझे आपकी जरुरत है, कृष्ण की नीद टूटती है,|पहले अर्जुन की से कहने को कहते है,|

इस पर दुर्योधन कहता है,बासुदेव पहले मै आया हु ,इस पर कृष्ण कहते है, नजर तो पहले अर्जुन पर पड़ी है,अतः पहले अर्जुन को कहने दो ,अर्जुन कहते है, ये बासुदेव युद्ध में मुझे आपकी सहायता चाहिए ,तब कृष्ण
कहते है,मै युद्ध में रहूगा पर विना अस्त्र -शस्त्र रहित एक बार फिर सोच लो अर्जुन, | अर्जुन कहता है, मुझे आपकी जरुरत है,|
दुर्योधन सोचता है, अर्जुन कितना मुर्ख है, उसकी पारी  आती है, तो वह कहता है,मुझे आप अपनी सारी अतुल्य सेना दे दीजिये , श्री कृष्ण कहते है, ठीक है,| 
इस प्रकार महाभारत युद्ध में, अकेले श्री कृष्ण अर्जुन के सारथी बन अर्जुन का पग-पग साथ निभाते है,|इस प्रकार श्री कृष्ण अपने दोनों याचको की भावनावो का आदर कर उन्हें अपनी सहायता प्रदान करते है,| और सत्य के साथी -सारथी बनते है,|

धन -दौलत रखी रह गयी ,रण-संग्रह बना सम्मान |
कृष्ण ने रखा सत्य का मान ,
महाभारत बन गयी मान-अपमान ,
महागाथा बन गयी ,असत्य के साथ की चली गयी जान ||
(song below )watch and read me indianthefriendofnation.blogspot.com also 
लेखक ;- झपकी के साथ .....रविकांत यादव 


श्याम तेरी बंसी ..किसका नहीं है ...(संगीत )


Friday, August 12, 2011

फूलो का तारो का ...जब से मेरी आँखों ....(संगीत)

बंधन की परीक्षा

रक्षा बंधन सावन में (agust )  में पूर्ण चन्द्र दर्शन (पूर्णिमा )के दिन मनाया जाने वाला पर्व है ,इसकी कई पौराणिक और एतिहासिक कहानिया मिलती है,| जिसमे इन्द्र -इन्द्राणी , कृष्ण -द्रौपदी , व हुमायु -कर्मावती , प्रमुख है,आप रक्षा बंधन से जुडी सारी बाते मेरे दिए पते से पढ़ सकते है, इस पर क्लिक करे ....



मै पता इसलिए दे रहा हु , क्यों की कॉपी करने से आपके ब्लॉग का कोई विशेष औचित्य नहीं रह जायेगा ,और
आपके स्वयं के रचनाओ पर भी प्रश्न चिन्ह लग जायेगा ,|

रक्षा बंधन   बधवाते समय मुख सूर्य की तरफ हो पूर्व होना  चाहिए , ऐसा एक t .v . पर एक शास्त्री जी बता रहे थे ,|
   यहाँ मै ,अपनी एक कहानी प्रस्तुत कर रहा हु,    |  एक राजा को अपने लिए विशेष मंत्री की आवश्यकता थी सो उसने सोच -समझकर अपने विशेष सभी दरबारियों को एक एक कार्य सौपा एक थाल में अन्नो के बीच रंग -बिरंगे छोटे -छोटे पत्थरो को मिला  दिया और कहा जो भी इन पत्थरों को अन्न से सबसे पहले  चुनेगा उसे मंत्री पद सौप दिया जायेगा ,उन सभी को एक एक कमरा सौपा जाता है ,| राजा प्रत्यक्षता पर ज्यादा ध्यान देता था ,उसका मानना था, जो बाते चल कर आती - जाती है, उसमे कही कुछ कमी आ जाती है|
              शुद्धता प्रथम होनी चाहिए ,राजा सभी के  कमरे में शरारती बच्चो को भेजता है,  कोई दरबारी बच्चो को डांटता है, कोई भगाता है, तो कोई मार देता है| एक दरबारी अपना कार्य करता रहता है, वह कुछ नहीं बोलता , शरारती बच्चे उसके चावल को गिरा भी देते है, तो भी वह बच्चो से ही मदद मांगता है,|


इस तरह वह राजा के लिए ही नहीं ,प्रजा राज्य के लिए भी योग्य मंत्री मिल जाता है ,धीरे -धीरे राजा और मंत्री सारे राज्य   में प्रिय -और प्रसिद्ध  हो जाते है, ||

                            अंत में यही की ये बच्चे ही, होते है, जिनकी अपनी दुनिया होती है, उस दुनिया में जीना भी एक करामात से कम बात नहीं होती , ये बच्चे जो छुपाते है, वो दिख जाता है, और जो दिखाते है, उस पर प्यार आता है,इनकी दुनिया सारे झमेलों से दूर ,थकान ,तनाव ,दूर करने वाली सुकून प्रदान करती है,क्यों की हम मानवों व्यस्क मानवों का समाज झूठ , छल-कपट ,ईर्ष्या, द्वेष ,ढोंग आदि से भरी हुई है,|
     
बच्चो के लिए;-
                             नन्हे -नन्हे तारो जैसे सारे...
                             बाते जैसे टीम-टीम हो सितारे .......
                             जीता जग सारा पर जहा इनसे ही हारे...
                             देखो सूरत भोली -भाली लगे कितने प्यारे ...

                             २)    बच्चो की दुनिया सबसे निराली ...
                                    सूरत भी जैसे भोली-भाली....
                                    खुश हो बजाये ताली ....          
                                    वरना मुह पर दे-दे गाली |
                                    2 songs above and below

                              लेखक ;- सस्नेह ...रविकांत यादव 
                                                    























































मै साथ रहुगा यार (संगीत)


Wednesday, August 3, 2011

रक्षक साँप



नाग पंचमी हिन्दू धर्म में नागपूजा का पर्व है ,हिंदु इन्हें नाग देवता कहते है ,|
जो उन्हें खुश रखने और कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है| ,हिन्दू धर्म में प्रमुख १२ नाग है ,अनंत, बासुकी ,शंख, पदम, कम्बल, कर्कोटक, अश्वतर ,घृतरास्ट्र,शंखपाल ,कालिया, तक्षक, पिंगल, |
भगवान् शिव जी का हार भी नाग है ,जो उनका भय मुक्ति का सन्देश देता है ,शेषनाग नागो में सर्वोपरी है |,नागो की माता मन्सादेवी(कद्रू ) है,| सावन में शिवपूजा का विशेष महत्व है ,इसी महीने में साँप भी ज्यादा दीखते है ,और उनकी पूजा का पर्व नागपंचमी पड़ता है ,| 


महाभारत में भी नागो का कई जिक्र है , एक महाभारत कथा में जब बालक भीम को दुर्योधन  (शकुनी चाल ) से धोखे से  खीर में महाभयानक विष देकर गंगा में फ़ेंक देता है ,उस विष की काट केवल नागो के पास थी  ,भीम बहते बहते नाग लोक में चले जाते है ,तब नाग देखते ही उन्हें काट लेते है ,वह मरने की वजाय जिन्दा हो जाते है ,और उनसे लड़ने लगते है , नाग उन्हें पकड़ कर नाग राजा वासुकी के पास ले जाते है ,|कहते है , हे नाग राज यह कोई साधारण बालक नहीं  जान पड़ता ,| तब नागराज उनसे पूछते  है , हे बालक तुम कौन हो ,भीम कहते है, मै,कुंती पुत्र भीम हु ,तब नाग राज बासुकी कहते है ,तुम अपने नाना के घर आ गए हो  जिस प्रकार भीष्म तुम्हारे पितामह हुए , उसी तरह मै तुम्हारा नाना लगुगा, कुंती मेरी पुत्री की पुत्री है ,| तब नाग राज ने भीम को आशीर्वाद  स्वरुप कटोरे में सुधारस दिया ,जिसके एक कटोरे में १००० हाथियों का बल था ,भीम ने ८ कटोरे सुधा रस (खीर) पीये और ८००० हाथियों का बल प्राप्त किया ,आठ दिन सोने के बाद भीम को सही सलामत धरती सतह पर भेज दिया गया ,|

अब मेरी लिखी कहानी एक राजा अपने अकूत धन सोने -हीरे मोती को अपने गुप्त स्थान पर कलश में भर कर छिपाकर रखता है ,अकूत धन को वह सुरक्षित स्थान पर  दबा देता है , उसे सदैव अपने धन की हिफाजत और चिंता रहती ,वह उसे बहुत ख्याल से रखता पर एक दिन उसकी मृत्यु हो जाती है ,धन से लगाव और धन की रक्षा की तीव्र इच्छा से तथा परोपकार में में न व्यय करना ,इससे वह साँप बनकर जन्म लेकर रक्षा करता है ,|
और प्रतिदिन शिव मंदिर पर गाहे बजाहे जरुर दिख जाता , एक बार  खोजी जानकार लोगो की नजर  उस साँप पर पड़ती है | वे समझ जाते है ,ये साँप जरुर कोई मकसद से घूमता है ,वे उसपर नजर रखते है तथा पूर्णिमा के दिन ५-६ लोगो का समूह एक जगह गड़े धन के लिए खुदाई करते है , तभी उन्हें वही साँप पुनः दिख जाता है ,वो उसे मारने की इच्छा करते है ,तभी वह अजीब ध्वनि करता है ,और कई दर्जनों साँप आ जाते है , वो सभी भाग जाते है ,पर धीरे -धीरे उन ६ वो की अलग -अलग जगह साँप के डसने से मृत्यु हो जाती है , तब से लेकर कोई उस खजाने के चक्कर में नहीं पड़ा ,|





वह साँप प्रतिदिन शिवभक्ति करता ,७०० साल तक ,एक दिन शिव उसकी भक्ति से प्रसन्न होते है ,|तथा उसकी समस्या कारन पूछते है ,सर्प बना राजा अपनी समस्या कहता है ,हे देवाधिदेव मेरी समस्या ये मेरा धन है ,मै इसे परोपकार में तथा अच्छे कार्य -व्यक्ति पर खर्च नहीं कर सका इसलिए सर्प बना घूम रहा हु , अतः आप मुझे उचित और अच्छा व्यक्ति दे ,जो इसे परोपकार में में व्यय कर सके तभी मुझे मुक्ति मिलेगी ,शिव जी उसे आश्वासन देते है ,सर्प बना राजा मुक्ति मोक्ष प्राप्त करता है ,|


शिव जी अपने ५ योग्य भक्तो को , एक निर्धन पर सच्चा  , एक समर्पित शिक्षक , एक समाजसेवक , एक धनी पर परम भक्त , और एक गृहणी को सपने में परोपकार राह पर चलते हुए कल्याण मार्ग पर लगाने को कह , धन उनके घर भेज देते है , और सर्प बने राजा को मुक्ति और मोक्ष मिल जाता है ,|(संगीत below)

लेखक ;- धार्मिक ....रविकांत यादव 




साथिया तुने क्या किया (संगीत )


Monday, August 1, 2011

शैतान बनाम भगवान




दोस्तों आज १ अगस्त मेरा जन्म दिन    है ,आज मै  अपनी   अच्छी कहानियों में से एक यहाँ और एक अपने दुसरे ब्लॉग पर प्रस्तुत कर रहा हु,| आशा है आपको भी अच्छी लगे ,|एक व्यक्ति अच्छा व्यक्ति यात्रा हेतु कही जा रहा था ,|रास्ते में रात हो जाती है ,| रास्ते में उसे शैतान का पुजारी घेर लेता है ,वह  पुच्छ्ता है ,कहा जा रहे हो , तब वह कहता है ,मै ईश्वर का भक्त हु और मरते दम तक अपने अच्छे कर्म - कर्त्तव्य पर विश्वास रखता हु ,तब शैतान का पुजारी बोलता है ,मै भी अपना कर्म करुगा तुझे मार सकता हु , सता सकता हु ,| दोनों अपने -अपने चरित्र के अनुसार थे ,| सारी परिस्थितया ईश्वर भक्त के विपरीत रहती है ,|फिर भी उसने भक्ति ,शक्ति और साहस का दामन नहीं छोड़ता ,|तर्क से बात जीद तक पहुच गयी दोनों ने अपनी पूजा से अपनी तर्क वाद -विवाद के लिए अपनी -अपनी शक्तियों का आह्वान किया ,शैतान औए भगवान के दूत आ जाते है ,|शैतान का उद्देश्य भगवान के भक्त को प्रभावित कर अपनी तरफ मिलाना और भगवान के दूत का उद्देश्य शैतान को अपनी तरफ मोड़ना था ,|

शैतान दूत बोला ;-मै नये नये तरीके को जन्म देता हु ,|

भगवान दूत :-तुम जिसलिए तरीके तलाशते  हो ,उसे मै उत्पन्न करता हु ,|

शैतान दूत बोला ;- मै न रहु तो तुम्हारा कुछ न रहे ,|

भगवान दूत बोला ;- मेरा है ही क्या ? कुछ ले सकता है तो ले ले ,|

शैतान बोला :- तुम्हारा वजूद मेरी वजह से है |

भगवान दूत बोला ;- वजूद तो शिव का भी होता है |

शैतान दूत बोला :- मै प्यास हु ,आ तुझे हर तरह से तृप्त कर दु|

भगवान्  दूत बोला ;-मै आस हु , आ मै तुझे इससे मुक्त कर दु |

शैतान बोला ;- मै गरज हु जिसे तुम सुन सकते हो |

भगवान का फरिस्ता बोला ;- मै चमक हु ,|जिसे तुम  देख सकते हो |

शैतान बोला ;- मै पहाड़ हु ,|

भगवान दूत बोले  ;-मै पत्थर हु |

शैतान बोला ;- मुझसे उलझ नहीं ,वरना मै आग हु ,|

भगवान दूत बोला ;- तू जहा से ख़त्म होगा वहा से मै आरम्भ हु |

शैतान दूत बोला ;- देख ये काली रात मेरी है ,|

भगवान दूत बोला ;- देख वो टिमटिमाते सितारे मेरे है ,|


क्रमशः ;-........due to piracy( संगीत इसके नीचे है )

लेखक ;-आस्तिक ....  रविकांत यादव २०१० 







                                   

राहो में उनसे मुलाक़ात ...(संगीत )