Monday, December 19, 2011

दुश्मनी

बिरजु, और सरजू पहलवान गाँव  में पडोसी थे , सरजू मन ही मन बिरजु से चिढ़ता था , जलता था , बिरजू जनता था ,सरजू उसका हितैसी नहीं है,| फिर भी वह उसे दुश्मन नहीं मानता था| ,सरजू बिरजू को परेशान करने ,लज्जित करने के नित नये -नये हथकंडे अपनाता रहता , कभी जानवरों को लेकर की तेरे जानवर मेरे खेत में घुसे , तो कभी बच्चो को लेकर , सरजू , बिरजू को गाली-गलौज से लेकर मार पीट पर उतर आता ,|
एक दिन , बिरजू को खबर मिली की ,उसके गेहू के ,तैयार फसल में ,आग लग गयी है , बेतहासा भागे -भागे वह फसल देखने गया तब तक उसके आँखों के सामने उसकी सारी  मेहनत की फसल जल गयी , |
उसे लगा यह काम जरूर सरजू का ही होगा ,वह सरजू के घर गया तो देखा ,वह मुस्कुरा कर सिगरेट पी रहा था , |
समय गुजरता गया एक दिन सरजू का बेटा , नीम के पेंड पर से दातुन तोड़ते समय गिर पड़ा , उसके हाथ- पैर 
टूट जाते है , वह मरणासन्न हो गया , सरजू बेतहासा दौड़ -दौड़ कर गाँव से मदद मांगता , गाडी -धोड़े वालो से वाहन मांगता पर उसके पहलवानी स्वाभाव के कारण सभी ने बहाना बना दिया , किसी ने उसकी मदद नहीं की , वह रोता , अपने भाग्य को कोसता , तभी सामने से उसे बिरजू की तरह कोई आते दिखा थोडा पास आया तो वह बिरजू ही था , उसे अपने आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था , |
तब बिरजू ने कहा एक पडोसी होने की वजह से अपनी गाडी से तुम्हारी सहायता का अधिकार तो बनता ही है ,|
सरजू फूट -फूट कर बिलखने लगता है , और बिरजू के पैरो में गिर पड़ता है , |

जाते -जाते यही कि,  मित्र , यदि मित्र के मित्र से मिले तो ठीक ,वरना मित्र , मित्र के दुश्मन से मिले तो सब कुछ गलत होता है , |

इर्ष्या की आग के लिए ...
पता न कैसे चिंगारी ज्वाला बन गयी ,
ऐसी ज्वाला जो न जलाये न तडपाये फिर भी शरिर की दुर्गति हो गयी |
धुएं की लपटे भी ऐसी की सभी से दूरी हो गयी ,
कुदरत ने सबक सिखाया तो आंसुओ की मज़बूरी हो गयी |

अंत में यही कि आप भी अपने blogsite की सभी रचना सुरक्षित रखे , मैंने अपनी रचना को कॉपी राईट एक्ट के अधीन सुरक्षित रखा है ,इसके लिए आप अपने वकील से मिल सकते है , मेरी सभी रचना सर्वाधिकार सुरक्षित है , यदि फिर भी चोरी होगी तो कोर्ट में जायुगा...........|

अब मै अपने एक और नये वेबसाइट पर भी लिखता रहुगा ...पता है ...
अगेन इंडियन ....http://againindian.wordpress.com/(click it)
लेखक ;- सहायक ...रविकांत यादव (m .com .२०१०)




Saturday, November 26, 2011

क्रिकेट की कबड्डी ...?

जिस तरह से आज भारत और वेस्ट इंडीज से आखिरी टेस्ट मैच ड्रॉ हुआ इसमे कोई संदेह नहीं की वास्तविक मैच तो सटोरी और आयोजक करने वाली  कंपनिया खेलती है , इसमे कोई संदेह नहीं की ये मैच फिक्स था ,| ऐसा लगा मानो सभी खिलाड़ी खेलवाड़ खेल कर आउट होते गए , कुछ तो मानो पहले से ही ,ड्रॉ मान कर खेल रहे थे, दो -तीन के अलावा  कोई  जीतने के लिए नहीं खेलता नजर आया , हमारी भारत की जनता बेवकूफ नहीं है ,1 अरब भारतीय जनता उन्हे बेवकूफ नजर आती है ,? | ये मैच जरूर फिक्स था , क्यो की आप को रन चाहिए , आप गेंद  डॉट कर दे, और तो और दो रन की जगह एक ही रन निश्चित कर भागना, जैसा की आखिरी गेंद पर हुआ, जबकि ड्रॉ तो निश्चित ही था , फिर किस बात पर अस्विन का ड्रॉ के लिए ही खेलना ये बात समझ से परे है , |

आप recorded विडियो  भी  देखे तो खिलाड़ियो की हकीकत दिख जाती है ,|
मानो ये कुछ गद्दार खिलाड़ी बस ड्रॉ के लिए ही खेल रहे थे , इसके पीछे या तो बड़े लोग थे ,या सटोरिये थे , या आयोजक कराने वाली कंपनी air tel कंपनी जो भी  हो  1 अरब भारतीय  जनता  टुकुर-टुकुर ताकती रहती है  , तो बेवकूफ है ,| जीतता मैच हारने की तरफ पहुच गया , फिर जीतने के लिए नहीं ड्रॉ के लिए खेला गया ,| ये मैच फिक्स कराने ,जीताने  ,हराने के खेल के पीछे पैसे की चकचौध और देश के  गद्दार खिलाड़ी है ,| ऐसे एक अरब भारतीय जनता से विश्वासघात करने वाले गद्दार खिलाड़ियो की कोई जरूरत नहीं , इस मैच की जांच होनी चाहिए , गद्दार खिलाड़ियो की परंपरा नयी  , नहीं है ,|

एक गंदी मछ्ली सारे तलाब को जहरीला बना देती है , खिलाड़ी कोई भी हो अगर उसके लिए देश प्रथम नहीं है , तो वह कितना विकेट लेता है , कितना रन बनाता है ,इससे कोई मतलब नहीं , तुरंत नये खिलाड़ियो को मौका मिले , जांच न होने से ही ऐसे खिलाड़ी शान से घूमते रहते है , अतः इस मैच की जांच हो , क्यो की खेल के ये खिलाड़ी ही दागदार ,और पचासों बार मैच फिक्सिंग , और सट्टा जैसी आदि बाते करते रहते है ,|

                                   
                                                    लेखक;- दर्शक .........रविकांत यादव
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Saturday, October 29, 2011

जौहर




कहानी उस प्राचीन समय की है , जब मुगलों से लोहा लेते हुए , बहुत सारे हिंदु मारे गए , हिंदु अपने आखिरी सांस तक लड़े पर विशाल सेना के आगे पराजय के साथ शहीद -बलिदान होना पड़ा , उनकी तमाम क्षत्रिय विधवाये,हजारो की संख्या में जौहर को निकल पड़ी , बेख़ौफ़ आग की चिता में खुशी -ख़ुशी समा कर सती होकर अपना जीवन बलिदान कर दिया , सभी के मौत के साथ  वो यमराज (धर्मराज)के नगरी पहुची तो अन्य  देवता घबरा गए , 

की आप लोगो की मौत का समय ये नहीं है ,| आप लोग अचानक इतनी की संख्या यहाँ कैसे आ गयी , जबकि अभी आप लोग के मौत का समय है ,ही नहीं ,तो मौत कैसे हो गयी ?, |यमराज के इस बात पर क्षत्राणियों ने अपना पति धर्म बताया तो यह सुनकर यमराज शांत हो गये, और अति द्रवित हुए , उनकी आँखों में आँसु आ गये , | उनका ह्रदय विचलित हो गया तब उन्होंने अपने ही कर्म दायित्व के सर्वोच्च जिसके वो भी कर्तव्य अधीन थे , किसी तरह वह , महाभयंकर ज्वालावो , घोर महानाद दृश्य से  , होते हुए डरते- कापते ,महायम तक पहुचने में कामयाब रहे , तथा उनसे सारी बात बताई ,कि मनुष्य कि पत्त्निया स्वयं हजारो की संख्या में अपनी खुशी से जल -मर रही है , | मेरा ह्रदय बिचलित हो रहा है , तब महायम बोलते है , मेरे लिए यह बहुत छोटी बात है , यही नहीं हर पल हजारो ग्रह बनते और बिगड़ते( विनाश होते ) रहते है , | अभी इन्हें जीना नहीं आया है ,| तुम अपने कर्म -कर्तव्य से मतलब रखो हा तुम इनके सम्मान में जरूर कुछ कर सकते हो ,तब मृत्यु देवता यमराज लौट आये ....


तब उन्होंने  क्षत्राणियों से कहा ठीक है , आप लोगो के समर्पण का कोई सानि नहीं , फिर भी आप लोगो के सम्मान में सारे संसार में एक जीव बनाया जायेगा ,|



जो ठीक आप लोगो के समर्पण को विश्व भर में पृथ्वी पर उदहारण देगा , तब से आज तक ये बरसाती फतंगिया , जलती रोशनी देखती  है , तो उसमे अपनी स्वेक्षा से घेर कर कूद कर अपना प्राण त्याग देती है ,|
                                               
                                                       लेखक;- फतंगो से परेशान......रविकांत यादव
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Tuesday, October 11, 2011

आज़ादी के आखिरी अमिताभ





आज ११ अक्टूबर है ,आज शरद पूर्णिमा का दिन है ,| मान्यता है ,इस दिन आज के दिन १६ कला से पूर्ण चंद्रमा आकाश से अमृत की वर्षा करता है , | इसलिए लोग खीर बना कर , खुला छलनी से ढक कर , रात में उसकी रोशनी में रखते है ,|और सुबह उसे ग्रहण करते है ,| हिन्दू धर्म में यह भी मान्यता है ,की आज धन की देवी लक्ष्मी और धन  बैभव के देव कुबेर , अन्य देव शिव परिवार ,इन्द्र  आदि   एक साथ रात्रि जागरण कर भक्तो पर कृपा करते है ,| यहाँ मै बताना चाहुगा माँ लक्ष्मी को चंद्रमा की बहन (माना)कहा गया है ,|

 संयोग आज ही ,भारतीय फिल्म स्टार अमिताभ बच्चन जी का जन्म दिन भी है ,|

हमारे देश के महान अभिनेता मिलेनियम स्टार ,सदी के महानायक जिनका जन्म ११ अक्टूबर १९४२ है ,उनके पिता जी की तरह लेखक उनके मित्र सुमित्रा नंदन पन्त जी ने उनका नामकरण किया था , " अमिताभ " जिसका अर्थ है , अमर ज्योति ( अमर प्रकाश )जो शायद अमित आभा से बना है ,|इनकी पहली फिल्म सात हिदुस्तानी है,|

अपने इलाहाबादी अमिताभ बच्चन ,उन्हें महान अभिनेता बनाने वाली उनकी भाषा में भोजपुरिया लहजा , तथा इसे पसंद कर सर आँखों पर बिठाने वाली केवल उनकी अपनी उत्तर भारतीय जनता है , बेशक आज वो कितने ही, धनी हो  पर उनका , एक रहेन इर एक रहेन बीर वाला गाना उनको एक गाँव  की माटी का देशभक्त घोषित    करता है ,| कभी यह कहानी युक्त ,गाना गाँव में बड़े अपने बच्चो को सुनाते थे | आज वो सात समंदर पार भी मैडम तुसाद संग्रहालय में भी अपने मोम के पुतले के साथ है |, उनकी एक कंपनी भी आई a ,b ,c ,  ltd , फिर वो क़र्ज़ में भी रहे,  फिर उन्होंने छोटे परदे से कौन बनेगा करोड़ पति से वापसी कर लोगो को करोड़ पति भी बनाया ,और हर घर के दिलो में अपनी पहचान बना ली , (k .b .C  )  के प्रश्न उत्तर  आप सेट इंडिया .कॉम से आप पा सकते है )आज हम उत्तर भारतीय उन पर चालीसा लिखते है ,और मंदिर भी बना देते है ,|

पर वास्तव में में उनके सफलता के पीछे हम उत्तर भारतीय लोगो का उनके फिल्मो और भोजपुरी लहजे के पीछे पागलपन ही है ,उनकी फिल्मे ही ले कालिया , don , हम , गिरफ्तार , शोले, आखिरी रास्ता, दीवार, अजूबा,सट्टे पे सत्ता ,अँधा कानून, कुली, अग्निपथ,नसीब, महान,मर्द,नमक हलाल, शान, शराबी, याराना, जंजीर, शक्ति, नास्तिक,नमक हराम, मुकद्दर का सिकंदर ,नटवरलाल, देशप्रेमी,चुपके-चुपके, काला पत्थर ,

लगातार फ्लॉप होती फिल्मे और उनकी अन्दर की आग इन्ही फिल्मो के भडास के रूप में आई और वो पुरे उत्तर भारत में देवता बन गए ,उनकी दमदार आवाज़ बादल की गर्जना बन गयी ,लोग उनके एक झलक को पागल हो गए ,मै उनका इन्ही दौर का प्रसंशक हु , उन्होंने हर धर्म -राज्य के लोगो का दिल जीतने की कोशिश की पर उत्तर भारतीयों का स्थान कोई न ले सका ,उनका कद और उम्र भारत रत्न का हकदार है , और यह दिन सभी प्रसंशको के लिए खुशियों का दिन होगा, |

यहाँ मै अपने जीवन से एक संस्मरण लिखना चाहुगा , मै चार में पढ़ रहा था , कभी कभार दूरदर्शन पर उनकी फिल्मे शनिवार के शनिवार  आ जाया करती थी , मन में होता अमिताभ बच्चन की फिल्म आ रही है , जैसे फिल्म न होकर दुनिया का सबसे बड़ा जादूगर ,या अजूबा  आ रही हो ,| एक बार ठंढ के साथ फिल्म देखते -देखते नीद से लुढ़क जाता  तो फिर देखने लगता यह क्रम कई बार चला , आखिर में ब्रेंच से गिर पड़ा और  शायद ब्रेंच से ही चोट लग गयी और मै चोट को महसूस करते दौड़ कर बेड पर जाते ही सो गया ,|

एक बार शायद  कक्षा ४-५ में हिंदी का क्लास चल रहा था ,और  एक कविता पढाई जा  रही थी ,शीर्षक था , खुनी हस्ताक्षर ..कविता कुछ ऐसे थी, वह खून कहो किस मतलब का जिसमे उबाल का नाम नहीं ,वह खून कहो किस मतलब का जो आ सके देश के काम नहीं .....मुझे कविता समझ में नहीं आ रही थी , सर शांत थे , मैंने पन्ना पलटा एक और रचना मिली .नीचे लेखक थे , हरिवंश राय बच्चन मैंने अपने  रोब के लिए क्लास में कह दिया ये अमिताभ बच्चन के पापा है , मेरे teacher आश्चर्य में थे और मै भी ,|  




और अब सोचता हु , देश भक्तो की परम्परा नयी नहीं है, प्राचीन है ,यह सत्य है , आज़ादी का महानायक अपनी पिता की प्रेरणा ,प्यार, प्रोत्साहन , की वजह से ही सिनेमा जगत का दुर्लभ   तारा है , आज भी उनकी dialog ही बहुत पसंद किये जाते है , इनके पिता एक महान विचारक कवि के रूप में आज भी है ,महान विचारक कवि मै इसलिए कह रहा हु की उनकी कविताये  , कृतिया महान सन्देश के साथ आज भी अमर है , उनकी कृतिया जैसे -उन टूटे तारो का अम्बर कब शोक मनाता है , --जो बताती है की यह मानव जीवन अनमोल है , अम्बर आकाश बहुत विशाल है , ठीक उसी तरह (प्रकार) इस जीवन संसार में भी छोटी मोटी बाते होती रहती है , यह मानव जीवन पर एक परमात्मा का हाथ सदैव अम्बर की तरह आशीष स्वरुप सभी को प्रदान है , अतः संसार में जीवन जीना ही जिंदगी का नाम है ,आशाये कभी ख़त्म नहीं होती ,|

उनकी एक और कृति बीत गयी सो बात गयी , जो बताती है ,हम जो जी चुके उस पर पछताने ,माथा पीटने से हमें कुछ भी हासिल नहीं होगा , हम लाख चाह ले पर उसे बदल नहीं सकते सो व्यर्थ पछता कर हम स्वयं को ही कस्ट देगे , बस केवल हम उससे यही सीख ले सकते है , कि भविष्य में यह दोबारा न होगा ,|

उनकी एक कृति है , है-अँधेरी रात पर दिवा जलाना कब माना है , - जो बताती है , चाहे घोर निराशा हो असमर्थता हो पर हमें कर्म करने से क्या जाता है , हमारा कार्य है , कर्म करना , जितनी विशाल दुःख हो निराशा हो पर मन के हारे हार और मन के जीते जीत है , अतः आशा के दीप को जलाए रखने वाला ही मंजिल प्राप्त करता है , यही ज़िन्दगी है ,और संघर्ष को सीढ़ी बनाकर ही सफलता के बुलंदी पर चमका जा सकता है ,|
for  more  हरिवंश राय बच्चन poem  click ;-http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%82%E0%A4%B6%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF_%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A4%A8

मै अमिताभ बच्चन कि आज कि फिल्मो में , बड़े मिया -छोटे मिया , खाकी, वक़्त - race against  time , सरकार राज  आदि फिल्मे अच्छी लगी , यदि आज वो अपने लोगो उत्तर भारतीयों को भूले या कुछ योगदान समाज कल्याण का न करे तो यह यह चमकते सितारे को अँधेरे में डूबने जैसा होगा , मुझे उनकी कॉमेडी अतुलनीय लगती है , उनके लिए सभी उत्तर भारतीयों के दिल में प्यार है ,मै भी उनमे से एक हु , मै उनके साथ , झकास अनिल कपूर , बिंदास गोविंदा , और सन्नी देओल का जबरजस्त प्रसंशक हु , |आज का दर्शक , कौतुहल , जिज्ञासा , बच्चो कि भागेदारी , भावेग ,अजब गज़ब स्पेशल effect , के साथ अच्छी कहानी ,के साथ आश्चर्य जनक असंभव चित्रण भी मांगती है , उस पर अच्छे गाने और बोल ( dialouge ) चार चाँद लगा देते है , उसके साथ item डांस धूम धडाका के साथ सामाजिक dialouge  भी मांगती है , पर अफ़सोस आज कि फिल्मे दो तरह से बनती है ,पहली कहानी के साथ और दूसरी फिल्म बनावो और किरदारों से स्पस्तीकरण देकर कहानी बनावो ,|

जाते -जाते यही कि मै भी इस भूतनाथ से प्यार करता हु , मै उनके अच्छे बहुत अच्छे स्वास्थ्य कि कामना करता हु ,वह एक living  legend   है , अभी मुझे उनकी कुली , इंसानियत  समेत बहुत सी फिल्मे देखनी बाकी है , |                                            
जाते जाते यही --विरासत का शहंशाह ग़दर के शान से देशप्रेमियो के लिए राजाबाबू के साथ , आशीर्वाद के गिरफ्तार से आकाश में नक्षत्र के  दामिनी है ,|(for more amitabh bachchan biography click);-http://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AD_%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A4%A8
अपेक्षावो का बोझ सबसे भारी  होता है , अच्छे -सच्चे लोगो कि अपेक्षा दोनों तरफ केवल प्यार के रूप में रहती है|

  लेखक;- एक धनी व्यक्तिव का प्रशंसक  ......रविकांत यादव also click me;            -http://indianthefriendofnation.blogspot.com/2010/09/blog-post_21.html

Wednesday, September 28, 2011

भावना





 नवरात्र का यह दूसरा  पर्व मनाया जाता है ,| पहला रामनवमी का और यह दूसरा नव दिनों तक चलने वाला ,| यह पर्व राम विजय ,दशहरा तक मनाया जाता है ,| इस समय पुरा उत्तर  भारत रामलीला के साथ माँ दुर्गा पूजा के साथ भक्ति मय हो जाता है ,| नव दिनों तक चलने वाला यह पर्व नव देवियों के पूजा का पर्व है ,| जो सभी माँ दुर्गा का ही रूप है ,| यह पर्व प० बंगाल में सबसे भव्य होता है ,| वह माँ दुर्गा की एक से बढ़कर एक पंडाल और मनमोहक प्रतिमाये स्थापित होती है ,| जो  नवरात्री समाप्ति पर विसर्जित की जाती है ,|वैसे पुरे भारत में प्रतिमाये स्थापित की जाती है , | हमारे वाराणसी में भी कई जगह भव्य पंडाल और दर्शनीय प्रतिमा स्थापित होती है ,| यह पर्व रावण वध के विजय जुलुस  दशहरा के  साथ समाप्त होता है ,| यह पूरा सितम्बर -अक्टूबर महीना पुरे भारत में ताबड़-तोड़ त्योहारों का महीना है , आप पता लगा सकते है? , कहा क्या मनाया जा रहा  है ?जैसे ;- गणपति पूजा से लेकर ओणम , डंडिया आदि |




अब मेरी शीर्षक कहानी ;- एक बार साधु -संतो का एक समूह अपने लिए सिद्धियों की प्राप्ति के लिए हवन -पुजा अर्चना कर रहे थे , तथा उसके लिए उन्हें महीनो विधि -विधान से मंत्रो का उच्चारण करना था ,| उसी समय एक अशिक्षित -अनपढ़ व्यक्ति उन विद्वान संतो के पास आया तथा विनम्रता से बातचीत जानकारी आदि लेने के बाद स्वयं भी सिद्धिया प्राप्त करने की लालसा व्यक्त किया | उसकी  इस बात को सुनकर साधु -संत हँसने लगे ,उसका उपहास करने लगे ,कि जिन सिद्धियों के लिए बड़े -बड़े विद्वान भी हासिल नहीं कर पाते, उसे तुम अनपढ़ -गवार छोटे साधारण व्यक्ति क्या प्राप्त करोगे ,? अतः तुम यहाँ से जावो अब हमारा समय न व्यर्थ करो ,? 
इस तरह सभी विद्वान संत प्रतिदिन किताबो से मंत्रो आदि का पाठ करने लगे , साथ में किसी तरह एक किनारे वह अनपढ़ भी किताबे उलटता -पलटता ,|
इसी दिन वह अनपढ़ व्यक्ति पुनः कुछ दिनों  बाद उन विद्वान संतो के पास आया पर इस बार उसे वह सिद्धिया प्राप्त हो चुकी थी , | जो उन विद्वान संतो को अभी तक  नसीब नहीं थी ,| इस पर सारे  साधु -संत  आश्चर्य चकित कि एक अनपढ़ यह कैसे प्राप्त कर सकता है| ,सभी उसके चरणों में झुक गए , तथा पुछा की यह कैसे संभव है ?, कि बिना मंत्र पढ़े , तुम सिद्धि प्राप्त हो गए ,तो उसने बताया कि वह भी उन लोगो के साथ मंत्रो को सुनता तथा आप लोगो कि तरह पन्ने पलटता पर उसे हर पन्ने पर केवल देवी का मनोहर छवि ही दिखती ,उनके विभिन्न रूप दिखते ,इस तरह उसने अपनी सिद्धि प्राप्त कर ली ,| अब सारे विद्वान उसके चरणों में माफ़ी मांग रहे थे ,| 

जाते -जाते यही देवी से आशय प्रकाशित करने वाला है , | सिद्धियों से आशय अन्य चमत्कारिक शक्तिया जैसे पानी पर चलना , हवा में उड़ना , आत्म तेज़ , अमर ज्ञान , विराट रूप धरना , किसी भी जगह पलक झपकते चले जाना ,आदि के योग्य बनना ही सिद्धिया है ,| जिस प्रकार हम कर्म करते है , तो कुछ मिलता है |,ठीक उसी प्रकार ईश्वर ने हमें कही न कही अपने उद्देश्यों के लिए ही बनाया है ,| हमारे कर्मो के कुछ भागो पर उनका ही  अधिकार है , परन्तु हम अपने बुरे कर्मो के जिम्मेदार स्वयं है ,| जाते -जाते यही की हमें सन्यासी लोग केवल यही सिखाते है ,प्रीत न रखो क्यों की प्रीत होने पर दर्द होगा , की वो कैसा है .ये कैसा है , | पर एक क्षण में सकुशल देख भर लेने से दर्द कम हो जाता है ,| शायद इसीलिए सन्यासी बनना कठिन है |

क्षमा करना आना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है , परन्तु यह सामने वाले की नीचता  दर नीचता के लिए मान्य नहीं है ,| पर कभी -कभी एक बूँद आँसू सारे अपराध शुद्ध कर देती है ,|

दर्द ,तड़प,प्रेम, पवित्रता , आँसु ,ताकत   के लिए ....

एक दीप ज्योति  चला लेकर   ,न जाने कैसे दिल में ही समा गयी ....
ज्योति भी ऐसी जो अन्दर ही अन्दर जला और तडपा गयी ...|
आँसु भी गंगा से जो गिरे एक और समंदर बना गयी ,
और नजरो से दुर एक द्वीप और किसी की दुनिया ही डूबा गयी |||

लेखक - दर्शनार्थी ....रविकांत यादव ...



जन्म

 
एक बेहद तेज़ तर्रार वकील जो दिल का अच्छा था ,| पर पैसे और शौक के लिए गलत कार्य भी कर लेता था |
उसका मानव शरिर छूटता है ,| भगवान की कोर्ट -कचहरी में ले जाया जाता है , उसे तो जैसे इस सब की आदत थी ,वह भगवान के सभी सवालो का सटीक उत्तर देकर शांत कर देता है |
अंत में इश्वर दूत बने जज पूछते है ,| तुम मासाहार क्यों करते हो , धरती के सारे अन्न -फल कम है ,क्या तुम्हारे लिए ?, | इस पर वह वकील बोलता है ,भगवान् आपने ही ये शरिर बनाया है ,जब मासाहार अच्छा लगता है , तो मै क्या करू , वैसे भी मै केवल खरीददार हु ,ईश्वर दूत बने जज कहते है ,ठीक है , | कोई आखिरी ख्वाहिस ? वह बोलता है ,मै मासाहार बिना नहीं रह सकता |तो ईश्वर कहते है , जावो तुम मच्छर ,छिपकली , सांप, शेर, बिल्ली , जन्म लो ,| आदि मांसाहारी  जीवो के बाद तुम्हारा केस फिर सुना जायेगा ????

           


हमारे शरिर में अनेक छोटे -छोटे बक्टेरिया है , हमसे ही उनका अस्तिव है , ठीक उसी प्रकार ईश्वर के लिए व प्रकृति में हम छोटे -मोटे कीड़े -मकोड़े है ,| परमात्मा से ही हमारा अस्तित्व है , हमारे तप जन्मो  तक साथ रहते है , भले ही  जीवन पशु रूप में जन्मे , कही न कही पंचदेव हमारे तप द्वारा और सजा ख़त्म कर प्रगति देते है|
जैसे एक शेरनी अन्य शावक को दूध पिलाती है ,| तो न्याय वही हो जाता है| , इसमें शेरनी का पुण्य कर्म है| क्यों की दैवीय इन्साफ तन्हा ही होता है ,|







     लेखक ;- शाकाहारी .............रविकांत यादव  also clik;- http://indianthefriendofnation.blogspot.com/

Sunday, September 4, 2011

विशेष विद्यार्थी की विजय गाथा (part 2)




दोस्तों यहाँ मै ,वो सब कुछ जानकारी  देने की  कोशिश  करुगा ताकि आपको जिंदगी में शायद अन्य के पास न जाना पड़े ,विश्व में शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर को मनाया  जाता है ,(unesco ) अलग अलग देश की  अलग अलग तिथिया है ,| भारत में 5 सितम्बर को रास्ट्रीय शिक्षक दिवस मनाया जाता है ,| ये डॉ. सर्वपल्ली राधा कृष्णन का जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है ,| वो एक शिक्षक (philosper ) थे ,| भारत के पहले उपरास्ट्रपति  बाद में भारत के दुसरे राष्ट्रपति बने ||
वैसे गुरु पूर्णिमा (पूर्ण चन्द्र दर्शन ) हिन्दू धर्म में बिशुद्ध गुरु पूजा का पर्व है , इसे महर्सी भगवान वेद व्यास के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है ,|इनका नाम कृष्ण दैपायन भी था |,काले रंग और दैपायन द्वीप पर जन्म होने से इनका यह नाम पड़ा ,बाद में वेदों की व्यवस्था १८ पुराण, महाभारत और गीता ग्रन्थ की रचना के कारण इनका नाम वेद व्यास हो गया ,|
अब जानते है ,एक विद्यार्थी कैसा हो , क्यों की ये आप के लिए है ,मै आप को उत्तीर्ण कराने की  गारंटी के साथ लिख रहा हु ,|
मन को बस में रखना सबसे दुर्गम में से एक है , एक विद्यार्थी के लिए केन्द्रित रोशनी हो ,जैसे लेम्प  इससे ध्यान केन्द्रित रहेगा ,विद्यार्थियों के  लिए भूत याद रखो ,वर्तमान जोर से परखो ,और भविष्य की चिंता करो , 
संभवत मुख्य बाते पेन्सिल से underline करे ,उसे लिखकर भी याद करे ,फिर आँखें बंद कर याद करने की कोसिस करे , प्रश्न खूब ध्यान से पढ़े , कुछ प्रश्न में ही छिपा रहता है ,|
केवल मुख्य बातो पर ही गौर करे , , विषय वार मुख्य बात फिर उसके कार्य याद करे ,|

एक एकलव्य था , उसे किसी गुरु की आवश्यकता नहीं पड़ी और वह स्वयं गुरु कृपा प्राप्त अर्जुन से भी बड़ा धनुर्धर बन गया , उसके पीछे उसकी कड़ी मेहनत ,समर्पण ,और सिखने की लालसा थी , उसे गुरु की आवश्यकता ही नहीं पड़ी ,हां प्रेरणा जरुर गुरु से मिली थी |

यदि आप में  सिखने की लालसा नहीं है तो फिर शिक्षा मुश्किल हो जाएगी ,|
 





प्रस्तुत है कुछ कालजयी प्रमुख  शिष्य ...श्रीराम , श्री कृष्ण , अर्जुन ,अरुणी, शिवाजी , चन्द्रगुप्त, तानसेन , विवेकानंद, संत कबीर , सभी ने गुरु आश्रम में ही शिक्षा प्राप्त की और अपने गुरुवो की प्रतिष्ठा में आश्चर्य जनक कार्य किये , एक कृष्ण थे ,खेलते तो खूब और कार्य करते तो निबटारे तक , विद्यार्थी को शांति के साथ स्थायी रहना होता है| ,शिक्षा एक शुद्ध तपस्या है , क्यों की विद्यार्थियों को विलासता और नशे से दूर रहने पर ही सफलता मिलती है , ग्राही सदा प्यासा रहता है , |

शिक्षक से जिद न करे तो ही हित में रहता है ,जैसे एक बार एक महान तपस्वी गुरु विश्वामित्र  से अपनी शिक्षा पूर्ण पश्चात गालव मुनि ने गुरुदाक्षिना देने की बार बार हठ किया तो क्रोध में विश्वामित्र ने उनसे १००० श्याम कर्ण घोड़े मांगे ,जिसे पूरा जोर से केवल ६०० ही मिल सके बाद में गालव मुनि ने विवशता जाता कर समझौता कर लिया ,जिम्मेदारी थोपने पर अच्छे खासे व्यक्ति का आत्मविश्वास भी डावाडोल हो सकता है ,परन्तु संघर्ष उपलब्धियों का वह सूरज है ,जिसकी परछाई सदैव साथ रहती है ,|शिक्षा एक विशुद्ध  तपस्या है ,गहराई होने पर जल शांत हो जाता है ,|
उदहारण ;- एक बार एक मशहुर  पहलवान थे , उन्ही का सिखाया शिष्य , राजदरबार में जाकर अपने आप को सबसे बड़ा पहलवान होने का दावा करता है , तब  राजा उसके गुरु को बुलाते है , दोनों में जंग होती है ,और गुरु जी अपने घमंडी शिष्य को  धुल चटा देते है ,हरा देते है ,तब शिष्य ने कहा गुरु जी आपने तो सब कुछ सिखा दिया था , तब गुरु जी ने कहा एक कला इसी दिन के लिए बचा रखी  थी  ,|

टने से अच्छा है ,समझो , जानो ,की इसका मतलब क्या है , ये है क्या ?, ज़हर है या अमृत , जैसे किसी कहानी को पढने से क्या शिक्षा मिलती है ,जैसे पचतंत्र की कहानिया ठीक उसी विषय प्रश्न का क्या अर्थ हुआ ,इसमें क्या हुआ ,इसमें क्या होगा , या ये क्यों है , सेलेबस से पढो सारांश क्या हुआ ,सारांश से पढो निष्कर्ष निकालो अभ्यास करो , रखे रखे तो तलवार भी जंग खा जाती है |

परन्तु यह भी याद रखो कुवे में कंकड़ डालने से पानी अपने  पास लाना मुर्खता होगी ,यह भी जानो पिछले साल कैसा पेपर आया था ,कौन कम नंबर का होता है |जो आये उसे पहले करे , इससे प्रभाव पड़ता है ,सुन्दर और  स्वक्ष लिखे,|
यदि आप विषय की तैयारी  कर रहे हो तो ,जो समझ में नहीं आता उस पर पेन्सिल से गोला या निसान लगा कर तुरंत आगे बढ़ जावो , उसे बाद में  शिक्षक से पूछो  |परन्तु कुछ विषय पल्ले ही नहीं पड़ता तो सीधी बात है , उसके अपने रास्ते है , तो उसे अपने अनुसार ढालो या स्वयं उसके अनुसार ढलो ,कोई टोपिक  किताब  से नहीं मिले तो नेट (इन्टरनेट)पर भी खोजे ,|

विद्या के लिए ब्राह्मन लोग ,अध्यन -अनुशासन-आज्ञापालन का सिद्धांत देते है ,| 
सिख धर्म कहता है , सत्य वही है जहा काल मर गया , अर्थात सत्य अमर है , हिन्दू भी सत्यम -शिवम् -सुन्दरम कहते है ,|जैसा की मार्कंडेय ऋषि के साथ हुआ था |
कराग्रे वसते लक्ष्मी , कर मद्दये सरस्वती करमूले तू गोविन्द प्रभाते करदर्शनम  यह श्लोक सच्चे अर्थो में हिन्दू मुस्लिम  एकता को जोड़ता है | और सुबह की महिमा का गुणगान करता है |

यदि विषय पल्ले न पड़े तो क्या करे , जैसे यदि ठण्ड लगती है तो वर्जिध करो , तेल मालिश ,या तो हीटर के पास रहो , या स्वेटर पहनो आदि इसी प्रकार विषय को अपने स्वरुप में लावो जैसे हमें मालूम है , हमें भूख लगी है ,और भोजन चाहिए , तो भोजन बनावो या ग्रहण करो हम जानते है |भोजन खाना है ,तो कोई हाथ धोकर ,तो कोई कांटा चम्मच , तो कोई सूप की तरह तो कोई  ice cream की तरह तो कोई सीधे मूह लगाकर पीना , चाहे जैसे हमारा  पेट तो भर ही गया लेकिन बर्तन की सफाई इग्जाम्नर(परीक्षक) पर छोड़  देते है ,|
लेखनी सुन्दर ,अभ्यास से ही हो सकती है ,| जो  क्लास  ५ के बाद असंभव लगने लगती है ,|गाँधी जी स्वयं अपनी लेखनी  देखना पसंद नहीं करते थे ,|
क्लास ५ से याद आया अपना एक यादास्त बाटना चाहुगा जब मै शायद  ३- ४ में था हमारी क्लास का सबसे लम्बा व्यक्ति जैसे १०-१२ के होते है ,पढने में कमज़ोर , माथे पर चोट का निसान कुछ लोग उसे क्रैक भी नाम रख दिए पर मुझे  वह दुनिया का सबसे खुश और अपनी दुनिया में मस्त रहने वाला लगता , मुझे लगता वो कह देगा पढाई जाये ...नरक में , बेपरवाह , बिंदास , मस्त ...केबल कनेक्शन का उसका खेल मुझे आज तक याद है , टोटल फ़िल्मी , वह क्लास में मस्ती कर रहा था ,जो भी मैंने नहीं देखा  तभी अंग्रेजी के सर  टी , राम  पटेल सर यकायक आ जाते है , आते ही हिडिक की आवाज़ निकाल कर , दरसल हिडिक की आवाज़ उनकी दांत पर दांत रख कर निकालने की एक अदा थी , हिडिक की आवाज़ के साथ उसका कान पकड़ कर उसे हवा खिला दिए ,थोड़ी देर में सारा क्लास शांत ,वह लड़का सीधे सबसे पीछे सबसे सीधा बनकर चुपचाप बैठ गया ,|
अब सर attendece लेने लगे नाम के साथ थोड़ी देर में उसका नाम बोला गया ,तो उसने पुरे जोश व ताव के साथ उठकर नो सर बोल दिया , सारी क्लास मुह दबाकर  हसने लगी , कुछ ने नहीं हसने में ही भलाई समझी ,शायद उसके गुस्से और लम्बाई को देखकर सर खिसिया कर डरते डरते उसके पास गए , वह लड़का भी थोडा डरा , लेकिन सर अपनी इज्जत बचने में कामयाब रहे ,थोडा डर संकोच में उसके पास तक गए फिर वापस आ गए और इधर उधर कर बेमन से पढ़ाने लगे , बाद में मैंने एक बात पर उसी लड़के की शिकायत प्रिंसिपल सर से की और सर ने उसे बुलावा भेज  जोर से उसे ज़मा दिए और वह भी मेरा यार गद्दार बन गया ,|
इन्ही सर के अंडर में एक बार हम लोग सारनाथ घुमने गए , घूमते -घुमाते एक बाग़ के आस पास पहुच गए एक मनबढ़ लड़के ने हाली -हाली ५-६ नारंगी तोड़ लिया ,देखा देखि सभी तोड़ने लगे मैंने भी एक तोड़ लिया ,सर ने जब देखा की सभी के पास नारंगी है, तो उनके पैरो तले जमीन खिसक गयी , जब हम लोगो को पता चला की सर को खबर लग गयी  है ,तो फटाफट सभी  नारंगी  फेकने लगे , सर वैसे तो अपने को बहुत स्ट्रिक्ट बनते थे पर पर वास्तव में थे नहीं , मालिक के डर से डरते डरते सभी को बुलाया और ५या १० बार उठक बैठक लगवाई ,|

चलिए विषय पर आते है ,तो सीधा सा मतलब है ,प्रश्न पढो -समझो लिखो या फिर अपने स्वरुप में लिखो , हां केवल इतना ज्ञान हो की हमें भूख लगी है और भोजन के रूप में प्रश्न पेपर और पुस्तिका मिल गयी है ,|
अब जैसे जल को हम h2o कहते है ,| जो दो का संयोग है , इसी प्रकार प्रश्न को यदि नहीं आ रहा है , तो दुसरे संयोग अपने स्वरुप (फॉर्मेट ) में किया जा सकता है , नंबर जरूर मिलेगे ,जैसे जल क्या है , जल hydrogan और
oxygen का  संयोग है , एक के भी अभाव में जल नहीं मिलेगा ,| जैसे जल के प्रकार कोमल (मृदु ) जल कठोर जल , वर्षा का जल इसे सुद्ध जल भी कहते है ,भू जल ,नदी जल ,तालाब का जल , झील का जल ,समुद्र जल ,तथा कैसे बनते है , तरलता का वास्ता देकर अन्य तरल तेल , दूध , घी, , पेंट , जूस ,आदि और इनके स्रोत ,कैसे बनते है ,कहा से मिलते है ,| वादा  है १० में से ४ नंबर तो मिल ही जायेगे और यह भी हम जानते है ,जल शुन्य से नीचे  तापमान पर जम कर बर्फ बन जाता है , ये उपरोक्त  अरुचिकर  विद्यार्थियों के  लिए है , फिर भी 
पढाई आपको हौवा लगती है तो मुक्त विद्यालय की शरण ले जैसे इग्नू (ignou ) हम जानते है ,साइकिल बिना पेट्रोल के चलती है ,और motorcycle पेट्रोल से दोनों में तुलना करे या हम जो चाहते है, उसे प्रथम रखकर कार्य करे या अपने स्वरुप में लाये तो ही सही होगा ,और सफलता मिलेगी ,|

किताबो का ढेर लगाकर या चस्मा लगाकर पढने से कुछ नहीं होता ,जरुरत होती है ,ग्रहण करने की फिल्मो के गाने फटाक से याद आ जाते है ,पर विषय पाठ याद नहीं होता कारन वो नीरस लगता है ,| तो उसे अपने स्वरुप में लाकर रुचिकर बनावो जिस प्रकार गाने ५ चरण में बनते है ,लेखक , सुर -लय , धुन , ताल , गायक , आदि  ठीक उसी प्रकार नियम बद्ध, चरणबद्ध , तरीके से पढो मैंने देखा एक महासय अपने बच्चे को रोज़ एक समय डाट कर किताब दे देते ,वह पढने में तो नहीं ,बैठे -बैठे सोने की कला में माहिर हो गया, एक बार मेरे एक सहपाठी ने कहा बोलो ईट पर नाच क्या है ,मैंने सोचा सायद सर्कस या ब्रेक डांस पर इसका मतलब electron की खोज thomsan ने protan की खोज radarford ने और nutron की खोज chedvik ने की , cdma क्या है ,ये मोबाइल तो है ही ,पर रोमन की गिनती आखिरी चरण तक है ,| बेटा मांगे कार  स्कूटर बाप रोये क्या है , जावो chemistry के सर से पुछो और periodic टेबल आसानी से याद करो , ||

अंग्रेजी के तमाम शब्द हिंदी से लिए गए है ,| जैसे जंगल ,क्लेश ,आदि जिनका मतलब हिंदी अंग्रेजी दोनों भाषा में एक ही सामान अर्थ है ,वैसे अंग्रेजी एक ऐसी भाषा है ,इसके व्याकरण ज्ञान से आप अच्छे ट्रांसलेट कर सकते है ,यदि आपको अंग्रेजी बोलना हो तो अंग्रेजी स्कूल क्लास की सरन ले , या लेनी पड़ती है ,|बोलने में आप जैसे भी बोल दे यह चल जाएगी , पर लिखने पर नहीं ,grammer ध्यान दो क्यों की लिखित प्रमाणपत्र की औकात ज्यादा है ,एक शिक्षक होना सबसे  कठिन है ,| जैसे जो रपट कर चले raptile हो गया ,जैसे holy भी है ,|
वैसे होली दिल के गुबार -पागल पंती हुडदंग से मिलने वाली शांति का पर्व है ,|

विषय वार  वर्तमान घटनाये ,general knowledge और उदहारण भी दो ,और price का फुल फॉर्म भी जानो ,एक तीर निशाने से चुके तो दूसरा प्रयोग  होता है ,इसलिए शब्दों का पर्याय वाची या shynoms भी रखो , यहाँ मै फिर अपने भूतकाल से एक संस्मरण लिखता हु ,|
मै शायद ४ - ५ में था ,राज इंग्लिश स्कूल -होस्टल में पढ़ रहा था ,एक दिन हमारे हिंदी शिक्षक रमण झा सर को  पता न क्या सूझी उन्होंने बड़े , जोश और दबाब देते हुए कहा कल इस किताब का पूरा सभी का पर्याय वाची याद  कर आना , मै ही नहीं अधिकतर जानते थे ,इतने सारे पर्याय वाची याद नहीं होगा याद भी हो गया तो ,भूलना निश्चित है ,कुछ लोग बहाना बना टसक लिए , मैंने लगभग याद किया , उस वक़्त ज्यादा कठिन भी नहीं था , कुछ ही  बलि  के बकरे थे ,क्लास में गिने चुने शायद १०- ११ या  ८-९ लड़के थे ,झा सर के घंटी के साथ उनका फ़िल्मी स्टाइल में एंट्री होता है ,झा सर पुरे ताव में घुसते ही किताब ले लिए ,उनके हाथ में ४ फिट का पुलिसिया डंडा था ,(उन्हें स्वयं सारे पर्यायवाची याद रहे हो ) किताब लेकर पहले विद्यार्थी से बोले , चलो बतावो -चलो बतावो, - चलो-  बतावो लगातार कहते -पूछते ,और झक में और जहा विद्यार्थी रुकता डंडा उठा कर हाथ निकालो -हाथ निकालो ,हाथ निकालो कुछ डंडा हाथ पर पड़ता कुछ बेंच पर धाड से  पड़ता , जैसे बाहर  वालो को लगे dynamite फटा हो ,मेरा नंबर भी आया , पूछते गए मै बताता गया , मै जनता था एक्का दुक्का नहीं बता पाउगा, वो जान गए की पूरा नहीं याद है , मै लडखडाया , उन्होंने डंडा निकाला डंडा हाथ को छुते हुए बेंच पर पड़ता धाड़ -धाड़  और सर तेजी से आगे बढ़ गए ,मुझे लगा मै वर्ल्ड कप जित गया , मुझे बहुत बाद में पता चला बुद्धि चली की डंडा जान बुझ कर बेंच से टकराता था ,जल्लाद की तरह या उनकी कोई एक्टिंग थी ,| सारे पर्यायवाची उन्ही की देन है ,| एक लड़के के साथ सायद सर गफलत कर गए , सायद उसी का झेप भी हो सकता है , या उसे भी पड़ी थी याद नहीं ,मैंने उन पर जातिवाद का आरोप भी लगाया था ,सायद वही वो साबित करना चाहते थे या कुछ और ,लेकिन मेरे साथ थोडा नरमी बरते ,हलाकि आगे की क्लास में घोर जातिवाद भी  मैंने देखा है , यह शिक्षक को एक कलंक है ,|लेकिन वहा कुछ बच्चो से गन्दी राजनीती , दुष्कर्म , शोषण ,उत्पीडन तक होता है ,शायद वही के निर्देसन में मुझे जान से मारने की २ बार पूरी कोशिस की गई, वहा के incharge एस, एन, यादव ने नंगा तक किया और दूसरी बार  नंगा कर धुप में खड़ा  करना चाहता था ,|उसके इशारे पर रामेश्वर (दुष्कर्मी )
चोर ,तानासाह ,दबंग , तिलक राज , भरत यादव,.शिवमंगल   .आदि सक्रीय थे , भोजन की व्यवस्था नरक थी ,| आदि आदि 


फिर विषय पर आते है ,रूप , रंग , आकर  प्रकार ,विशेषता ,महत्व ,उद्देस्य , मकसद ,उपसर्ग ,प्रत्यय ,आदि जानो परन्तु एक देश या राज्य की राजधानी पूछी जाय तो मतलब विशेष स्थान ,व्यक्ति , या समय यहाँ रटना ही सही होगा ,परन्तु परिक्षण ज्ञान को निखार   देता है , जैसे सोने पे सुहागा ,इसलिए दार्शनिक -,प्लेटो ,सुकरात ,अरस्तु ,उनका ज्ञान आज भी है | इसलिए गुरुजनों की क्लास न छोडो , राहत में अच्छे संगीत सुनो , शायद हमारे भारत में बहुत लोग 

अपने नाम का अर्थ ही नहीं जानते ,असफलता पर हताश न हो , अब्राहम लिंकन जो अमेरिका के सबसे सफल राष्ट्रपति में गिने जाते है ,उन्हें लगातार जीवन भर असफलता मिली और पहली और आखिरी सफलता बुढ़ापे में पद और सफलता राष्ट्रपति की मिली ,प्रारभ में भारतीय सिनेमा जगत और मिलेनियम स्टार अमिताभ बच्चन की लगातार १८ फिल्मे फ्लॉप रही , और क्रिकेट के भगवान् सचिन ६ साल तक one day क्रिकेट (एकदिवसीय ) में शतक नहीं बना सके थे , मशहूर वैज्ञानिक एडिसन भी उम्र के आखिरी पड़ाव पर सफल और मशहूर हुए ,इसलिए आत्महत्या न करो , अर्जुन को भी केवल चिड़िया की आँख दिखाई दी थी ,इसी तरह पढने वाले के बगल से साँप, बिल्ली गुजर जाये तो उन्हें पता न चलेगा ,सोना तप कर ही साबित  होता   है ,|
कूप मंडूक भी न बनो , चिड़िया का बच्चा जब घोसले से बाहर निकाला तो बोला बहुत बड़ा है ये संसार ,एक बार 
स्वामी  विवेकानंद कोई किताब पढ़ रहे थे ,कुछ देर बाद उनके शिष्य ने उनसे उसी किताब से जहा -तहा से प्रश्न पूछने की इच्छा जताई विवेकानंद जी ने बड़ी  सरलता से सभी प्रश्नों का उत्तर दे दिया ,शिष्य को आश्चर्य हुआ ,उसने कहा यह कोई साधारण शक्ति नहीं है ,| विवेकानंद जी बोले नहीं यह ब्रम्हचर्य के पालन की शक्ति है ,|एक बार भारत के महान गणितज्ञ रामानुज को पूर्णांक से भी अधिक नंबर मिल गया ,हलाकि यह संभव नहीं है, फिर कैसे ? उन्होंने एक ही सवाल को दो -तीन -चार  method से पद्धति से हल किया था | राजा महाराजा के ज़माने में आर्किमिडिज़ ने भी अपना सापेक्षकता का सिद्धांत २४ घंटे और महीनो लगातार सोचने के बाद दिया ,|जहा चाह वहा राह ,|यदि फिर भी आप पढाई में कमज़ोर है ,तो हर्बल आयुर्वेदिक बादाम भिगोकर ले ,खाए या उसका तेल सर पर रखे , मेध्यवती,(मेधावटी  )ले  शंख्पुस्पी ले soyaprotien ले अस्वगंधा ले , गाय के दूध शहद के साथ ले , ओमेगा ३ ले ये मछलियों में पाया जाता है ,जिससे खून पतला होगा गर्म होगा  दिमाग के कोने तक
 पहुचेगा  ,दिल भी सुरक्षित रहेगा ,ग्रीन टी भी ले इसमें गजब प्रतिरोधक प्रतिरक्षा और ताजगी मिलती है ,|(डॉक्टर सलाह आवश्यक  )हर्बल आयुर्वेदिक दवा उपचार हानिरहित होते है , और दूरगामी दुष्प्रभाव भी नहीं होता ,|क्यों की अन्न हानि  नहीं करता ,|

लेट कर सो कर न पढ़े इससे शिक्षा और शरीर दोनों की हानी होगी ,अपने से कमज़ोर सहपाठी के लिए शिक्षक बनो तुम्हे भी लाभ मिलेगा और दुसरे का भला के साथ सम्मान भी मिलेगा |
सबसे बेहतर विकल्प है शब्दकोष (dictionary )रखो प्रतेक विषय का अलग -अलग शब्दकोष होता है , अर्जुन बनोगे या एकलव्य पर याद रहे रा  से राम होता है , तो यही रा से रावण हो जाता है , परीक्षा में negetive मार्किंग होने पर न आने पर उस प्रश्न को छोड़ देने में ही समझदारी है ,नम्बर के अनुसार ही अपने शब्दों को लिखे , एक प्रश्न पर जितना नंबर निश्चित हो उतना ही शब्दों को लिखे , २ नम्बर के प्रश्न पर २ पन्ना लिखना मुर्खता है |,अधिक से अधिक ४-५- ६ लाइन ही लिखे ,|क्यों की नंबर और समय सिमित और निश्चित  होते है ,|
कंप्यूटर एक फ्रीज़ की तरह है इसमें आप बर्फ भी जमा सकते है ,इस पर मैंने पहले ही लिख रखा है ,|

एक बार हनुमान जी से जामवंत जी ने पुछा हे पवन पुत्र आप उड़ने कैसे लगते है , तो उन्होंने कहा मै स्वयं नहीं जानता बस मै कार्य को निष्ठां ,जोश ,लगन, और अच्छाई सहायता के लिए सच्चे दिल से समर्पित रहता हु |

छात्रों बनने का बोझ न लो ,स्वयं बनकर आने का बोझ लो ,जो तुम्हारा मन करे बनो क्यों की दबाव में अच्छा खासा व्यक्ति भी डावाडोल हो जाता है ,|
हिन्दू धर्म में विद्या ,तप ,दान , ज्ञान , शील , गुण ,धर्म , से रहित (इसके अभाव में ) व्यक्ति जानवर के समान माना गया है ,|
अंत में यही कि श्रम व्यर्थ जा सकता है ,इससे शरीर घट सकता है , पर ज्ञान से शरीर बच सकता है ,और ज्ञान कि एक बूँद भी प्यास बुझा सकती है ,अतः ज्ञान अमर है ,इसे ग्रहण करो ,विस्वास के साथ कदम रखो ,सारी बारीकियो को ग्रहण करो और अजेय अमर बन जावो ,क्यों कि स्थिर कुछ भी नहीं है ,सिखने और ज्ञान कि कोई परिधि नहीं है ,कुछ लोग कला को पूजा मानते है ,बदलाव ,परिवर्तन जरूर होता है ,सभी नस्वर है ,पर सूर्य अपनी जगह स्थिर है ,और अपना छाप छोड़ जाता है , |
                                                   














 




विद्यापीठ के सर कृष्णकुमार जयसवाल सर( लडकियों के हितैसी )ने एक बार क्लास में चर्चा किया था ,कि पढाई में  पास होना  ,फेल होना  और टॉप करना अपनी जगह है ,पर अच्छे आचरण का धनी होना झूठ न बोलना , विनम्र , अच्छा होना  आदि -आदि खूबियों से इनकी तुलना नहीं हो सकती |

एक हताश विद्यार्थी के लिए ..........

चला पर रास्तो से अनजान था ,
क्या करे कमबख्त बरसते बादलो  से परेशान था ,|
वृक्ष तले गया तो हवावो का शान था ,
क्या करे एक ही तो जान थी ,पर उसके साथ भी किसी का मान था ,|


मेरी रचनावो पर आईडिया पर फिल्मे बनती है तो अच्छा लगता है ,पैसा मिले तो ठीक है , एक बार मैंने idea का फुल फॉर्म खोजा , असंतोष होने पर मैंने अपना स्वयं का फुल फार्म बनाया जो है ...intelligent desirable educated aim ...क्या ये उचित है , विचार दे .....मैंने गाँवों के लिए एक हल्की,सस्ती , waterproof , solar .मोबाइल battery , charger बनाने का विचार बनाया लेकिन पैसे के अभाव में मेरा अधिकतर प्रयोग ठप पड़ा है |,इसमें मै magnifying ग्लास भी लगता जो सूर्य कि रोशनी का संवर्धन बढ़ा देगा ताकि दो घंटे में battery चार्ज हो जाये  इसके अन्य विकल्पीय उपयोग  भी है ,|


 जाते -जाते यही कि गुरु का सम्मान इतिहास सिखाता है , मै अपने विद्यापीठ और अन्य यदि, कोई  ,से माफ़ी मांगता हु ,मै sort temper हु और या जो भी मेरी गलती  हो ..| जाते -जाते

१) गुरुगोविंद दोउ खड़े काके लागु पाय..बलिहारी   गुरु आपने गोविन्द दिवो बताय ..
२)गुरु र ब्रह्मा ,गुरु र विष्णु ,गुरु र देवो महेश्वर र, गुरु साक्षात् परमम् ब्रह्मा तस्मे गुरुवे नमो नमह ;
३) असतो माँ सद्गमय ,तमसो माँ ज्योतिर्गमय ....

यही गुरु ही हम पर कृपा करते है ,और और राह दिखाते है ,|

बच्चो के लिए ....

हँसते -खेलते ,चहकते उछलते कूदते  शरारती नटखट बच्चे ....
यहाँ -वहा इधर उधर फिर भी मन के सच्चे ...
कभी बाते भी बड़ी -बड़ी पर लगे उम्र के कच्चे ....
मासूम भी ऐसे लगे सभी को अच्छे ...|

लेखक ;- सहपाठी .....रविकांत यादव ...२०१०