Sunday, August 17, 2014

सम्बोधन (a honour)


कौरव व पांडवो के बीच अब युद्ध निश्चित था ,जोड़ तोड़ की राजनीती दोनों तरफ थी , बासुदेव श्री कृष्ण सूर्यपुत्र कर्ण को पांडव भ्राता व जेष्ठ होने की दुहाई देकर सत्य की लड़ाई में अपनी तरफ करना चाहते थे ,।
कर्ण  ने अपनी , दुर्योधन की दोस्ती पर कुठाराघात न करने की सलाह दी , तथा अपने ही लोगो से अपमानित होने वाली बाते  कही ।
कृष्ण ,कर्ण से पूछते है , कि आपकी पहचान क्या है ,। मै  आपको क्या सम्बोधित करू क्यों की आप अपने ही भाइयो के विरूद्ध है ।
कर्ण श्री कृष्ण को समय की कीमत  व आवयश्कता को गिनाने लगा , तब श्री कृष्ण बोले हे वीर योद्धा मै आपको सर्वोच्च पदवी कौन से शब्द से सम्बोधित करू, मेरी सहायता करे , कर्ण बोला आप दुसरो की तरह मुझे दानवीर कह सकते है ।
कृष्ण ,कर्ण से बोलते है ,क्या आप एक वृक्ष से बड़े दानवीर है । कर्ण  शांत था और कृष्ण प्रशन वाचक। …।
एक वृक्ष जो परोपकार करता है ,लेकिन उसकी जड़े नहीं दिखती ,शीसम तो अपनी जड़ो को भी बिसरने नहीं देता ,तथा उनको भी अधिकार देता है ,एक वृक्ष फल  होने पर झुक जाता है , अपनी प्रकिृति को बनाये रखता है ,धोखा  नहीं देता शांत, स्वयं निर्भर रहता है , एक वृक्ष बनना बहुत बड़ी उपलब्धि है,यह हिन्दू धर्म में मोक्ष का एक और मार्ग है  ,क्यों की सबकुछ होते हुए भी उसका कुछ नहीं होता । व सभी को सामान भेदभाव मुक्त सेवा देता है , । पक्षी हो या पथिक भेद भाव रहित होता है , मुसीबते आप को और भी निखार देती है , सोना तप कर और भी चमकीला हो जाता है , जो एक वृक्ष सिखाता है ,आंधी ,तूफान ,की तरह जीवन में आई समस्या का सामना करो उनके अनुकूल बनो अपनी डालियो को त्याग कर बलिदान और अपनी बुराइयो को त्याग करने का सन्देश भी देता है । महारथी कर्ण एक चन्दन का वृक्ष था ,। यह हमारे व्यक्तिव पर निर्भर है ,कि हम कौन से वृक्ष है ।

                                       लेखक ;- पेड़ -पौधों से.…रविकन्त यादव





Friday, August 15, 2014

१५ अगस्त १९४७ से.…… (strength, stem (base) and structure a celebration )

सभी जानते है , वर्तमान ही ९०% किसी भी जीवन , समाज , व देश का सर्वे सर्वा  है । मेरा मानना है , यदि किसी संस्था , राज्य या देश के हित  अहित , नीति निर्धारण से ही बनता है । ।
मानिये पिछली सरकार गैस ,पेट्रोल , आदि के दाम ५० से सीधे १०० रूपये करे तो , वर्तमान सरकार हर हाल में उसे १००रूपये  से नीचे कम नहीं कर पायेगी , अर्थात पिछली सरकार संस्था या राज्य के सर्वे -सर्वा जो रास्ता बनायेगे वर्तमान में चुनकर आने वाले उसे ही अपनाएंगे और उसे कम  या सुधारेंगे  नहीं बल्कि उलटे उसे दो -चार रूपये और बढ़ा देंगे ॥
मेरे कहने का तात्पर्य यह है । वर्तमान सरकार ,राज्य , देश या कोई बड़ी संस्थाए के कार्यो ,नीतियों ,गलत निर्णय ,सफलता ,असफलता आदि के लिए एक अलग मंत्री पद मंत्रालय विभाग जरूर बने जो पिछली कार्यो की समीक्षा करे। …
उनके गलत कार्यो आदि को जनता को बताये और यह भी बताये की वर्ष भर में कुल जनता से कितना राजस्व (धन) एकत्र किया जाता है और उसका व्यय कहा किया जाता है । पाई -पाई का हिसाब आज के कंप्यूटर की मदद से उसे हर विभाग की दिवार पर चस्पा देना  चाहिए ।

इस तरह एक टीम बनाने से लूट- खसोट रुकेगी वो जानेगा की भविष्य की सरकार उनके सारे कच्चे चिट्ठे जनता के सामने खोल कर रख देगी अतः वर्तमान सरकार को एक ऐसा मंत्रालय मंत्री पद व विभाग रखना चाहिए जो भूतकाल के सरकारों की कार्य समीक्षा ,सफलता ,असफलता ,कमिया चूक उजागर करना , भ्रस्टाचार का कारण मानक के अनुसार की ५ वर्ष में कितने सफल रहे , नीतिया कागजो पर चली  कि हकीकत में योजना का धन कितना प्रतिसत सफल रहा ,… गलत निर्णय का आधार , बेहिसाब व्यय ,अनाप सनाप दाम बढ़ाना जनता के लिए क्या किया क्या नहीं ५ वर्ष में a.c. की हवा ही लेते रहे और  सोते रहे , शिमला मनाली घूमते रहे आदि को जनता के सामने उजागर करना , …।आदि कारणों को जान कर उसे सुधार  कर जनता को नया सन्देश के साथ कार्य से देश व देशवासियो को राहत  दे। ……जय हिन्द। ……
लेखक.... पुनः स्वतंत्रता दिवस से। …रविकन्त यादव। 

Friday, August 1, 2014

काल (a bonding )

एक बार एक ऋषि जंगल से गुजर रहे थे ,तो उन्होंने देखा तीन व्यक्ति आपस में लड़ रहे है  । 
ऋषि ने वहा  जाकर पूछा तो पता चला तीनो , भूतकाल , भविष्य और वर्तमान काल है । 
जो अपने को बड़ा साबित करना चाह रहे है ,। 
तब उन्होंने ऋषि  को विवाद हल करने  को कहा। …… 
तब ऋषि ने उनसे बारी बारी समय देने को साथ बिताने को  कहा। … पहले भूत काल उन्हें साथ लेकर जंगल घुमाने चलता है ,। 
उसे जंगल के खतरों का ज्ञान था , कहा कौन फल होंगे उसे ज्ञान था ,उसको ऋषि को खिलता है ,। 
फिर उसके बाद वर्तमान के साथ ऋषि घूमने जाते है , । वह सारे समय ऋषि से लोभ व चालाकी वाली बात करता है ,व अपने को श्रेष्ठ कहने का निवेदन करता   है ,। 
तभी शेर आ जाता है.... वर्तमान ऋषि को भाग कर जान बचाने को कहता है। । 
फिर ऋषि भविष्य के साथ घूमने जाते है , तो भविष्य बोलता है , हे ऋषिवर जंगल में खतरा हो सकता है । 
अतः हमें अदृश्य होकर घूमना होगा , । 
अब ऋषि पुनः तीनो के साथ आते है ,। ऋषि भूत को ज्ञानी कहते है। . वर्तमान को सजग, स्वार्थी । 
और भविष्य को चालाक की संज्ञा देते है । 
इस प्रकार किसी भी मनुष्य का स्वार्थ ही उसका भूत व ,भविष्य निर्धारण करता है । 
वर्तमान का स्वार्थ दोनों कालो को प्रभावित करता  है । 
वर्तमान विवेक, संयम ,ज्ञान के साथ कर्म करने को कहता है ,,अच्छा या बुरा कर्म ही हमारे भूत और भविष्य दोनों को प्रभावित करता है । 

हमारे जीवन में भूतकाल हमें ज्ञान, अनुभव,देता है । वर्तमान हमें अपनी कीमत पहचानने को कहता है ,और भविष्य हमें आगे की देखना सिखाता है , ठीक वाहन की तरह । 
लेखक;-वर्तमान के साथ। …रविकान्त  यादव 

year by year .....creates another ....by wandera the kent

                                  news   paper at a glance.....so...
                                freedom...must ....
                                      a..nut .....bheja fry
                                     all below agricultural knowledge by student "model" b.h.u. farmer meeting




                                         use natural resource











                                            how to make a crop of mushroom a proteinfull vegetable
                                        new research  increase production


                                           reduce pollution make secure water without orsenic




                                                  dept. of  journalism n mass comm.  exhibition












                                                      spring season .....patjhad












a snake catch a frog on a public road feerless

                                            saree   embroidary  machine






                                                              blackberry makes tounge blue .......

                          by;- wandera the kent Ravikantyadav