Saturday, March 28, 2015

प्रलय (a destination in to the universe )

इस धरती क्या ? ब्रह्माण्ड में भी समय का ही राज चलता है ,।  पत्थर ,पानी कुछ  अमर नहीं है , पत्थर को ज्वाला मुखी का लावा पिघला सकता है , या वो कणो में टूट रेत  बन जाता है , लोहे को जंग लग ख़त्म होना है , पानी को हवा , हवा को ठण्ड , ठण्ड को ऊष्मा , (सूर्य)  नस्ट कर देता है , । 
इसी तरह सूर्य भी ऊर्जा प्रदान करते करते क्षीण होकर ख़त्म हो जायेगा । , मानव भी समय से नस्ट हो जाता है , । एक समय आने पर ये पृथ्वी भी नस्ट हो जाएगी , कही न कही मानव ही इसका सूत्रधार होगा , कारण बेहिसाब दोहन एक इंटरनेशनल रिपोर्ट और सर्वे से यह बात सामने आई है, कि एक पृथ्वी की जनसँख्या हेतु हमें 4  या सात पृथ्वी की आवयश्कता पड़ेगी , कहा से लायेगे अन्य 7 पृथ्वी ,? हो सके शायद यह पूर्ति मंगल या चाँद से पूरी हो या मानव वहा बसने योग्य हो जाये , । 
ठीक चरित्र सुपर मैन के ग्रह क्रिप्टॉन जैसे हालात भी हो सकते है , फिलहाल हम मानव पृथ्वी का दोहन कर मज़े से जी सकते है ,। यहाँ यह प्रश्न है ?, क्या हम ब्रह्माण्ड में अकेले है ,? जब एक पृथ्वी के लिए एक सूर्य काफी है , तो  ब्रह्माण्ड में तमाम सूर्य (तारे ) क्या कर रहे है , ? जाहिर है , ब्रह्मांड में पृथ्वी की तरह अन्य तमाम ग्रह भी है , । जिस दिन हमारा विज्ञान  प्रकाश वर्ष से आगे बढ़कर दुरी का हल जान जायेगा , ब्रह्माण्ड के सभी ग्रह तो नहीं कुछ जरूर दिख जायेगे , नासा ने केप्लर दूरबीन जो अंतरिक्ष में प्लांट है ,  की सहायता से अब तक १००४ पृथ्वी की तरह ग्रह खोजे जा चुके है ,जिनके अपने अपने सौरमंडल भी है , । 
अतः हमारी तरह तमाम सभ्यताए ब्रह्माण्ड में है , व तमाम शायद  नष्ट भी हो चुकी हो , क्यों की सृजन व विनाश एक साथ चलते है । 
अतः कह सकते है, पृथ्वी एक बस है , और हम उस पर सवार  राही , हो सकता है , विनाश से पूर्व पृथ्वी हमें किसी अन्य ग्रह के करीब ले जाये , क्यों  की मेरी खोज से पृथ्वी अपनी धुरी से थोड़ा जगह बनाते हुए आगे बढ़ रही है , वरना हर साल एक जैसा होता यह भी हो सकता है , कोई अन्य ग्रह ही  पृथ्वी के करीब से गुजरे और हम उस पर shift  हो जाये , फिर भी पृथ्वी की करोडो व सालो की सभ्यता वहा कैसे विकसित होगी , आसान नहीं होगा भाला  लेकर शिकार करना या बैठ कर t.v. देखना , । 
मेरी खोज में यह भी साबित है , ब्रह्माण्ड भी घूम रहा है , ठीक घडी की सुइयों की तरह इस ब्रह्माण्ड में सभी का अपना अपना स्थान है , तमाम गतिशील है , व सभी कही न कही से ऊर्जा प्राप्त कर रहे है , शायद सूर्य से , या ब्लैक होल से या मैग्नेटिक फ़ोर्स या फील्ड से ??यहाँ बता दू हमारी पृथ्वी एक सेकंड में ३० किलोमीटर की रफ़्तार से सूर्य की परिक्रमा या चक्कर काट रही है , जिससे साल बनता है , यानि ३६५ दिन में ३० km / s की रफ़्तार से सूर्य का एक चक्कर लगा लेती है ,। साथ ही पृथ्वी अपनी जगह spin घूम भी रही है , इसकी रफ़्तार आधा किलोमीटर प्रति सेकंड की है ,०.5 km/s  की है ,जिससे रात -दिन होता है , धरती पर एक तरफ १२ घंटे का दिन तो दूसरी तरफ 12 घंटे की रात,क्या हमें  यह सब पृथ्वी पर रहते हुए पता चलता है ,??। 

फिलहाल पृथ्वी की उम्र का आकलन मानव का ही काम है , और यह हमारे धर्म में ही उल्लेखित है ।, मंगल ग्रह पर जीवन की खोज हो रही है , तो कयास यह भी लगाया जा रहा है , कभी वहा  जीवन था , तो प्रश्न यह है , की कभी वहा जीवन था तो इस पर रहने वाले लोग गए कहा ,? उनकी सभ्यता का अंत कैसे हुआ ?, ॥ 
वैसे हिन्दू धर्म में मंगल को पृथ्वी का बेटा बताया गया है ,। इसलिए यह काफी कुछ पृथ्वी जैसा है , और इसकी जमीन लाल रंग की है ॥
 सृजन और विनाश तो एक दूसरे के पूरक है , । और यह चलता रहेगा और विनाश हम रोक भी नहीं पायेगे यह किसी भी रूप में हो सकता है , पुणे में मॉलिड  गाँव ही धरती में समां गया , जो जहा है ,विनाश उसी का बहाना लेकर होता है ,। उत्तराखंड का जल प्रलय ,या अवलांच ,भूकम्प, द्वारका नगरी का समुद्र में समाना ,सुनामी , टोरनेडो, नगरो का लावे में समाना , जलप्लावन , और उल्कापिंडों की टक्कर ,कभी उल्कापिंडों की टक्कर से धरती से डायनासोरों का अंत हुआ था आदि आदि ,॥ 
अतः कह सकते है , तमाम नए ग्रह बनते व बिगड़ते रहेंगे , कही पात्र वही रहेंगे बस खेल व नज़ारे दूसरे हो जाते है ,। तो कही स्थान नज़ारे वही होते है, और पात्र ही बदल जाते है । मानिये इस समय की ताक़त को और इसको ,मानने व जानने व सही समय का सदुपयोग करने वालो का ही यह यह समय इज़्ज़त करता है ॥ 
 और उन्हें सफलता देता है , । हमारी पृथ्वी पर रामायण , महाभारत इतिहास हो चुकी है , ।  परन्तु हम मानव के लिए अनंत ब्रह्माण्ड में कही किसी ग्रह पर रामायण चल रही हो , तो किसी अन्य ग्रह  पर  महाभारत तो कही डायनासोरों का युग तो कही पासान युग इतिहास तो कही फिल्म अवतार का पंडोरा  ग्रह  है , को कही क्रमिक विकास से स्तिथि planet of the ape की तरह ,तो कही जिस तरह हम मानव है ,तो  कही बानरो या स्वानो का राज हो, तो कही mars attack जैसा हालात हो सकते है ,।  तो कही किसी ग्रह पर सन 5000 या किसी ग्रह पर सन 15000 हो रहा हो ,।बस कही पात्र तो कही स्थान नज़ारा  ही बदल जाता है ,।  वो कहते है, न समय से पहले और भाग्य से ज्यादा कुछ नहीं मिलता।
                                लेखक (writer );-समय के साथ  … रविकांत यादव ( Ravikant yadav )




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